जयपुर। राजधानी जयपुर के टोंक रोड स्थित सांगानेर क्षेत्र में संचालित श्री पिंजरापोल गौशाला एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। गौसेवा और गौसंरक्षण के नाम पर मिलने वाले सरकारी अनुदान, दान सामग्री और गौशाला की भूमि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और गौसेवा से जुड़े संगठनों ने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अधिवक्ता मुनीश कुमार शर्मा द्वारा जारी विधिक नोटिस में भूमि उपयोग, निर्माण गतिविधियों और गौशाला की मूल भावना से हटकर हो रही गतिविधियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। नोटिस में कहा गया है कि यदि समय रहते स्थिति की जांच नहीं हुई तो भविष्य में भूमि दुरुपयोग और अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है।
गौसेवा से जुड़े लोगों ने राज्य सरकार, पशुपालन विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गौशालाओं को मिलने वाले सरकारी अनुदान और दान राशि का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होना चाहिए ताकि वास्तविक गौसेवा प्रभावित न हो।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
पिछले 10 वर्षों का विशेष ऑडिट कराया जाए
वास्तविक गौसंख्या एवं मृत्यु दर की स्वतंत्र जांच हो
सरकारी अनुदान और दान राशि के उपयोग की जांच की जाए
प्रदूषित जल से चारा उत्पादन पर रोक लगाई जाए
आवश्यकता पड़ने पर प्रशासक नियुक्त किया जाए
अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई हो
गौसेवा कार्यकर्ताओं का कहना है कि गौशालाएं केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि पशु संरक्षण और सामाजिक सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में यदि कहीं भी अनियमितताओं की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, ताकि आमजन का विश्वास बना रहे और गौसेवा की मूल भावना सुरक्षित रह सके।






