साइबर अपराध के बाद पहले 60 मिनट सबसे अहम, तुरंत करें शिकायत: डीआईजी शांतनु के. सिंह



 जयपुर, 7 जून। साइबर अपराध का शिकार होने के बाद शुरुआती 60 मिनट, जिन्हें ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है, पीड़ित के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान त्वरित शिकायत दर्ज कराने से न केवल ठगी गई राशि को फ्रीज कराया जा सकता है, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर अपराधियों तक तेजी से पहुंचना भी संभव हो जाता है। यह बात राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम डीआईजी एवं आईपीएस अधिकारी शांतनु के. सिंह ने कही




वे प्रभा खेतान फाउंडेशन की ‘सहयोग’ पहल के अंतर्गत अशोक क्लब में आयोजित ‘ट्रेंड्स एंड प्रिवेंशन ऑफ साइबर क्राइम’ विषयक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

डीआईजी सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक साइबर अपराधियों के सबसे आसान निशानों में शामिल हैं। ठग अक्सर लालच, भय और झूठे प्रलोभनों का सहारा लेकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों के पीछे मुख्य कारण जागरूकता की कमी, असुरक्षा की भावना और लालच होते हैं। ऐसे में लोगों को नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बारे में लगातार जानकारी हासिल करते रहना चाहिए।



उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता, जागरूकता और सही जानकारी है। वर्तमान समय में डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी फ्रॉड, डीपफेक स्कैम, सोशल मीडिया इम्पर्सोनेशन और फर्जी निवेश योजनाएं सबसे तेजी से बढ़ने वाले साइबर अपराधों में शामिल हैं। अपराधी आधुनिक तकनीक और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों का भरोसा जीतकर उनसे बैंकिंग जानकारी, व्यक्तिगत डाटा और धनराशि हासिल कर लेते हैं।

डीआईजी सिंह ने लोगों को सलाह दी कि किसी भी अनजान कॉल, संदेश, लिंक या ऑनलाइन निवेश प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी पूरी तरह जांच-पड़ताल करें। उन्होंने विशेष रूप से निवेश संबंधी ऑफर्स को स्वीकार करने से पहले सेबी से सत्यापन करने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराध की शिकायत के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 के अलावा राजस्थान पुलिस के विशेष व्हाट्सएप नंबर 9256001930 और 9257510100 भी 24 घंटे उपलब्ध हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डीआईजी शांतनु के. सिंह ने विस्तार से जवाब दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में अजय सिंघा ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि अंत में जगदीप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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