जयपुर आर्ट वीक 5.0: भोर राग से लेकर ‘अंधा युग’ तक, कला ने रचा संवाद का सेतु

 

जयपुर, 28 जनवरी।

जयपुर आर्ट वीक (एडिशन 5.0) के दूसरे दिन बुधवार को शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और समकालीन चेतना एक साथ जीवंत नजर आई। सुबह की रागात्मक साधना से लेकर संग्रहालयों में कला-संवाद और सार्वजनिक स्थलों पर कला हस्तक्षेपों तक, पूरा दिन कला, स्मृति और समय के बीच संवाद का साक्षी बना।

कार्यक्रम की शुरुआत आमेर किले स्थित जगत शिरोमणि मंदिर में आयोजित ‘भोर राग: मॉर्निंग सत्संग’ से हुई। ऐतिहासिक परिवेश में सितार और तबले की संगत ने शास्त्रीय संगीत को समकालीन संवेदनाओं से जोड़ा। यह सत्र केवल संगीत प्रस्तुति नहीं, बल्कि ध्यान और आत्मिक अनुभूति का अनुभव बना। सत्र का संयोजन संदीप रत्नू (जयपुर विरासत फाउंडेशन) द्वारा किया गया।


दिन के प्रमुख आकर्षणों में वरिष्ठ कलाकार अनिता दूबे की चर्चित कृति ‘अंधा युग’ रही। इस कृति ने दर्शकों को समकालीन समय की नैतिक, राजनीतिक और मानवीय जटिलताओं पर सोचने को विवश किया। सत्ता, हिंसा, स्मृति और उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर आधारित यह प्रस्तुति एक सशक्त कलात्मक वक्तव्य के रूप में सामने आई।

शाम को ज्ञान म्यूज़ियम में आयोजित क्यूरेटेड वॉकथ्रू के साथ दिन का समापन हुआ। क्यूरेटरों के मार्गदर्शन में दर्शकों ने समकालीन और पारंपरिक कला कृतियों का अवलोकन किया, जहां सामग्री, स्मृति और दर्शन के विविध आयाम सामने आए।


दिन भर कलाकार संवाद, पिंक सिटी स्टूडियो में लघु चित्रकला पर चर्चाएँ, बड़ी व छोटी चौपड़ पर सार्वजनिक कला हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि जयपुर आर्ट वीक अब एक सशक्त वैश्विक कला मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।

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