जयपुर आर्ट वीक 5.0: विरासत, तकनीक और कल्पना के बीच रचा संवाद

 

जयपुर, 29 जनवरी।

जयपुर आर्ट वीक 5.0 के अंतर्गत शहर में कला, वास्तुकला और विरासत के विविध आयामों को जोड़ने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी है। महोत्सव के तीसरे दिन आयोजित गतिविधियों ने जयपुर की ऐतिहासिक संरचनाओं, पारंपरिक शिल्प और समकालीन रचनात्मक प्रयोगों के बीच एक सशक्त संवाद स्थापित किया




दिन की शुरुआत गोविंद देवजी मंदिर से हुई, जहां डॉ. चांदनी चौधरी के नेतृत्व में ‘जयपुर जेनेसिस: ढूंढाड़ 2.0’ हेरिटेज वॉक आयोजित की गई। यह यात्रा जलेब चौक, सीरेह देओढ़ी का दरवाज़ा और ढुंडुबी पोल से होती हुई बड़ी चौपड़ तक पहुंची। इस दौरान कल्कि मंदिर, सवाई मानसिंह टाउन हॉल, हवा महल, ईसर लाट और सम्राट यंत्र जैसे स्थापत्य प्रतीकों के माध्यम से पारंपरिक और यूरोपीय वास्तुकला के आपसी संवाद को रेखांकित किया गया



इसके पश्चात गोलचा गार्डन्स, आगरा रोड में आयोजित ‘गिल्डेड वॉल्स: एनकाउंटर अराइश’ सत्र में ख़ानूम और अराइश जयपुर द्वारा प्रतिभागियों को जयपुर की पारंपरिक अराइश कला से परिचित कराया गया। सत्र में चूने आधारित सतहों और प्राकृतिक रंगों की ऐतिहासिक तकनीकों पर प्रकाश डाला गया।

युवाओं और डिज़ाइन में रुचि रखने वालों के लिए पाटी में कोड ड्रिफ्ट कलेक्टिव द्वारा जेनरेटिव ज़ीन जैम कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें कोड, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के माध्यम से कहानी कहने के नए रचनात्मक प्रयोग सामने आए।

दोपहर में अलसीसर हवेली में प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़र ऑलिवर सिंक्लेयर द्वारा संचालित ‘मंथन’ फ़ोटोग्राफ़ी प्रदर्शनी वॉकथ्रू आयोजित हुआ।

शाम को आरआईसी में कला शिक्षा से जुड़ी ड्रॉप-इन गतिविधि ‘छोटे जीव, बड़ी कल्पनाएं’ आयोजित की गई, जिसमें अंकिता परिहार, छवि गोलिया और शुभम गेहलोत का योगदान उल्लेखनीय रहा।

इसके बाद ‘हम कौन-सी दुनिया बनाएंगे?’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसके उपरांत ‘वर्ल्डबिल्डिंग फॉर हेरिटेज, वॉल्यूम 01’ पुस्तक का विमोचन किया गया। यह प्रकाशन अंतरिक्षा स्टूडियो और अविनाश कुमार द्वारा संकल्पित है, जिसमें प्रो. तनिष्का, सायन सन्याल और चारुवी अग्रवाल सहित कई विशेषज्ञों का योगदान रहा। चर्चा का संचालन अविनाश कुमार ने किया।

दिन का समापन कलाकार अयाही द्वारा प्रस्तुत हाईपर रियल लाइव ऑडियो-विज़ुअल परफ़ॉर्मेंस के साथ हुआ, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संगीत, जनरेटिव विज़ुअल्स और एआई तकनीक के माध्यम से समकालीन तकनीकी यथार्थ पर विचार प्रस्तुत किया गया।

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