फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा 10वें एचआर एवं स्किल्स समिट का आयोजन




जयपुर, 5 फरवरी।

आज के दौर में पाठ्यक्रम निर्माण के लिए उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सशक्त साझेदारी अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक पाठ्यक्रम—चाहे वह किसी भी स्तर या विषय से संबंधित हो—में आर्थिक साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता, वैश्विक जागरूकता, नागरिक साक्षरता, स्वास्थ्य साक्षरता एवं पर्यावरणीय साक्षरता को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

यह विचार आईसीएफएआई बिजनेस स्कूल (आईबीएस), जयपुर की निदेशक डॉ. श्वेता जैन ने फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा आयोजित 10वें एचआर एवं स्किल्स समिट के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।



डॉ. जैन ने कहा कि उद्योग जगत को मेंटर्स, फसिलिटेटर्स, प्रशिक्षकों एवं सह-शिक्षकों के रूप में सीधे कक्षाओं से जुड़ना होगा। पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने से लेकर उसके प्रभावी क्रियान्वयन तक और कक्षा शिक्षण से लेकर वास्तविक कार्य-अनुभव तक, यह संपूर्ण शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र उद्योग और शिक्षा संस्थानों द्वारा मिलकर विकसित किया जाना चाहिए।



उन्होंने भारत के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जहां प्राथमिक शिक्षा स्तर पर नामांकन दर 93–95 प्रतिशत है, वहीं माध्यमिक स्तर पर यह 77–80 प्रतिशत रह जाती है। उच्च माध्यमिक स्तर पर यह लगभग 56 प्रतिशत और उच्च शिक्षा में घटकर मात्र 28–30 प्रतिशत रह जाती है। इंडिया@2047 विज़न के अंतर्गत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में GER को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका और जिम्मेदारी को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने बताया कि देश में लगभग 71 प्रतिशत उच्च शिक्षा संस्थान निजी क्षेत्र में हैं, जो कुल उच्च शिक्षा का लगभग 60–62 प्रतिशत योगदान देते हैं।



इस अवसर पर आईबीएम इंडिया एवं शेल मलेशिया के पूर्व कार्यकारी निदेशक (एचआर) डॉ. अकील बुसरई ने भविष्य की कार्यदुनिया में एचआर की बदलती भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि संगठनों को पारंपरिक प्रणालियों से आगे बढ़ते हुए डेटा-आधारित और कस्टमाइज़्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम्स अपनाने होंगे। वार्षिक प्रशिक्षण पुस्तिकाओं और पारंपरिक सक्सेशन प्लानिंग को अप्रासंगिक बताते हुए उन्होंने सरल और परिणामोन्मुखी मॉडलों को अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।



डॉ. बुसरई ने कहा कि एचआर की सबसे बड़ी ताकत उसका मानवीय जुड़ाव है। कोविड-19 जैसे कठिन समय में एचआर प्रोफेशनल्स ने सहानुभूति, संवाद और मानवीय दृष्टिकोण के माध्यम से अपनी अहम भूमिका को सिद्ध किया।

फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के को-चेयरमैन एवं इंसोलेशन एनर्जी लिमिटेड के चेयरमैन मनीष गुप्ता ने कहा कि आज के कर्मचारी केवल रोजगार नहीं, बल्कि उद्देश्य, लचीलापन, कल्याण और व्यक्तिगत विकास की अपेक्षा रखते हैं। ऐसे में एचआर अब संगठन की संस्कृति, उत्पादकता और दीर्घकालीन विकास का रणनीतिक आधार बन चुका है।



उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे राजस्थान विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, एमएसएमई, सेवा क्षेत्र एवं पर्यटन में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है, वैसे ही ध्यान नौकरी सृजन से हटकर रोजगार-योग्यता और सतत कौशल विकास पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और रिन्यूएबल एनर्जी को आने वाले दशक के चार प्रमुख परिवर्तनकारी क्षेत्र बताया।



कार्यक्रम के अंत में फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के सदस्य एवं अक्षय इन्फ्रासिस इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी अक्षय हाडा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि एआई कभी भी मानव संसाधन का स्थान नहीं ले सकता, क्योंकि एचआर मानवीय संवेदनाओं, समाधान और सकारात्मक ऊर्जा का मूल स्रोत है, जो संगठनों को सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाता है।

सत्र का संचालन फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के डायरेक्टर एवं हेड अतुल शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि यह समिट ऐसे समय में आयोजित हुआ है, जब संगठन श्रम कानूनों में बदलाव, कार्यबल की बदलती अपेक्षाओं, तकनीकी नवाचार और उभरती कौशल आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढाल रहे हैं।

समिट के दौरान तीन प्लेनरी सेशंस भी आयोजित किए गए—

फ्यूचर वर्कप्लेसेज: रीडिज़ाइनिंग एचआर फॉर द फ्यूचर ऑफ वर्क

कन्टेम्पररी एचआर: लीडिंग पीपल, परफॉर्मेंस एंड कल्चर

स्किल डेवलपमेंट: इंडस्ट्री-लेड मॉडल्स फॉर एम्प्लॉयबिलिटी


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