जयपुर, 11 फरवरी 2026। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करते हुए पर्यटन, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखते हुए राजस्थान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दूरदर्शी रूपरेखा पेश की।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2047 तक राजस्थान को वैश्विक, ग्रामीण और इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन सुविधाओं, हेरिटेज संरक्षण, धार्मिक स्थलों के उन्नयन और आधुनिक अवसंरचना निर्माण से जुड़े कई ठोस प्रावधान किए गए हैं।
मुख्य घोषणाएं और योजनाएं:
तनोट-जैसलमेर क्षेत्र: आधारभूत ढांचा मजबूत, यातायात प्रबंधन, पर्यटक सुविधा केंद्र, सुरक्षा और स्वच्छता।
हेरिटेज वॉक-वे: पुष्कर, खाटूश्यामजी, नाथद्वारा, डीग, चित्तौड़गढ़ में 30 करोड़ रुपये से पैदल पर्यटन मार्ग विकसित।
आमेर किला और कस्बा: 50 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल म्यूजियम, आकर्षक लाइटिंग, साइनज और पार्किंग सहित विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाएं।
भरतपुर: 100 करोड़ रुपये की लागत से ब्रज कन्वेंशन सेंटर का निर्माण।
शेखावाटी: 660 से अधिक हवेलियों का संरक्षण और सुधार, 200 करोड़ रुपये का निवेश।
थार सांस्कृतिक सर्किट: जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, बाड़मेर और जालौर शामिल।
ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण: गढ़ पैलेस (झालावाड़), किराड़ू मंदिर (बाड़मेर), अजमेर किला, सुनहरी कोठी (टोंक) में 18 करोड़ रुपये।
गांवों और ग्रामीण पर्यटन: होम-स्टे संचालकों को ब्याज अनुदान, हॉस्पिटैलिटी प्रशिक्षण, ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं का विकास।
लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक आयोजन: संभाग स्तर पर लोकनृत्य उत्सव, पारंपरिक खेल और भवाई को संरक्षित करना।
सुरक्षा और महिला गाइड्स: टूरिज्म असिस्टेंस फोर्स (टीएएफ) मजबूत, 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था।
त्योहार और धार्मिक आयोजन: दीपावली, होली, शिवरात्रि, रामनवमी और गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों की सजावट और आरती हेतु 13 करोड़ रुपये।
नई धर्मशालाएं और हवाई कनेक्टिविटी: बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर नीति, सीकर-झुंझुनूं और भरतपुर-डीग हवाई अड्डों की संभावनाएं।
बजट में पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे धार्मिक, सांस्कृतिक, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आधुनिक अवसंरचना और वैश्विक ब्रांडिंग से जोड़ा गया है। प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में स्थानीय रोजगार, व्यापार और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को नया आयाम मिलेगा।


