अजमेर, 11 फरवरी 2026। राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 को अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने पशुपालकों के लिए “दिशाहीन और आंकड़ों व शब्दों का मायाजाल” करार दिया है। चौधरी ने कहा कि बजट में डेयरी और पशुपालकों को केवल झुनझुना पकड़ाया गया है, वास्तविक राहत का कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के तहत पहले 5 रुपये प्रति लीटर दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि कम से कम 7 रुपये प्रति लीटर की जानी चाहिए थी, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई निर्णय नहीं लिया गया।
चौधरी ने बताया कि जिला दुग्ध संघों एवं आरसीडीएफ में कार्यरत लगभग 2500 ठेका श्रमिक, जो पिछले 15-20 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें स्थायी करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया। अन्य विभागों की तरह संविदा कर्मियों को नियमित करने की घोषणा नहीं की गई और ना ही 2500 रिक्त पदों पर भर्ती का कोई उल्लेख है।
उन्होंने मिड-डे-मील योजना के तहत जिला संघों पर बकाया 300 करोड़ रुपये के बजट में शामिल न होने पर चिंता जताई और कहा, “आर्थिक ऑक्सीजन के बिना संस्थाएं कैसे जीवित रहेंगी?”
चौधरी ने बजट में डेयरी और पशुपालन को कृषि क्षेत्र घोषित न करने, बेसहारा पशुओं के लिए ठोस प्रावधान न करने, निःशुल्क सेक्स सॉर्टेड सीमन की उपलब्धता पर कोई घोषणा न होने और जिला संघों के चुनाव समयबद्ध कराने में विफलता पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने बजट में जिला संघों के लिए घोषित 2000 करोड़ रुपये के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रावधान को "मुंगेरी लाल के हसीन सपने" करार दिया। साथ ही सरस ब्रांड के विस्तार के लिए 100 करोड़ रुपये को “मृगतृष्णा” बताते हुए कहा कि बाहर के विस्तार से तब कोई लाभ नहीं जब राज्य के दुग्ध संघ आर्थिक संकट में हैं।
चौधरी ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते सरकार सुधारात्मक कदम नहीं उठाती है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कमजोर होगी। उन्होंने कहा, “आंकड़ों की बाजीगरी से पेट नहीं भरता, ज़मीन पर ठोस निर्णय चाहिए।”
