राष्ट्रीय संस्थागत नेतृत्व शिखर सम्मेलन (NSIL–2026) का समापन

 


जयपुर, 17 फरवरी 2026।

राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय “राष्ट्रीय संस्थागत नेतृत्व शिखर सम्मेलन (NSIL–2026)” का समापन मंगलवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरिभाऊ किसनराव बागड़े थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में वासुदेव देवनानी और एम. जगदीश कुमार उपस्थित रहे। कुलगुरु अल्पना कटेजा ने अतिथियों का स्वागत किया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यालय संचालन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता, संस्कार और व्यक्तित्व का समग्र विकास है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को शिक्षा क्षेत्र में मूलभूत परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए शिक्षकों से इसे नवाचार और समर्पण के साथ लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा की मजबूती, शिक्षक प्रशिक्षण और परिणामोन्मुख शिक्षण पर बल दिया।



विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल रोजगारोन्मुख संस्थान न होकर राष्ट्र निर्माण, लोकतांत्रिक मूल्यों और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकता के संवर्धन के केंद्र बनने चाहिए। उन्होंने तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए भारतीय शिक्षा को पुनः वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।


प्रो. एम. जगदीश कुमार ने उच्च शिक्षा में चरणबद्ध सुधार, अनुभवात्मक अधिगम और “कम्पिटेंसी पोर्टफोलियो” विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल और नवाचार आधारित शिक्षा समय की मांग है।



 



कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने कहा कि सम्मेलन ज्ञान–यज्ञ के समान रहा, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने दूरदर्शिता और करुणा को नेतृत्व का आधार बताते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर बल दिया।


सम्मेलन में “जयपुर डिक्लरेशन” के छह स्तंभ—विकास, विचार, विमर्श, विधि, विस्तार और विद्वान—को व्यवहार में उतारने पर जोर दिया गया। साथ ही उद्योग–अकादमिक सहयोग, आधुनिक तकनीक, एवीजीसी सेक्टर और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।


कार्यक्रम का संचालन प्रो. संजय शर्मा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनील कुमार जांगिड़ ने दिया। देशभर के विश्वविद्यालयों, आईआईटी और आईआईएम के कुलपति, निदेशक, शिक्षाविद एवं शोधार्थी सम्मेलन में उपस्थित रहे।

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