जयपुर। भारतीय दर्शन में नारी को ‘नारायणी’ और सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। इसी दिव्य स्त्री शक्ति के साक्षात्कार का अवसर दे रही है ‘एका: द वन’ प्रदर्शनी, जिसका आयोजन जवाहर कला केन्द्र की अलंकार दीर्घा में किया जा रहा है। केरल की वरिष्ठ चित्रकार डॉ. बीना एस. उन्नीकृष्णन की इस ट्रैवलिंग एग्जीबिशन का मंगलवार को दूसरा दिन रहा, जहां बड़ी संख्या में कला प्रेमी पहुंचे।
प्रदर्शनी में 64 योगिनियों पर आधारित 68 पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। देवी साधना में चौंसठ योगिनियों का विशेष स्थान है। प्रत्येक योगिनी अलग-अलग दिव्य ऊर्जा और सिद्धियों की प्रतीक मानी जाती है। इन चित्रों के माध्यम से दर्शकों को इन ऊर्जाओं का आध्यात्मिक अनुभव कराने का प्रयास किया गया है।
चित्र पूर्ण होने के बाद मंदिरों की यात्रा
डॉ. बीना का कहना है कि उनके भीतर की स्त्री ऊर्जा ने ही उन्हें इस सृजनात्मक यात्रा के लिए प्रेरित किया। 64 योगिनियों के चित्र पूर्ण करने के बाद उन्होंने संबंधित मंदिरों की यात्रा भी की, जिसे वे अपने जीवन का अत्यंत गहरा और परिवर्तनकारी अनुभव मानती हैं।
डॉक्यूमेंट्री में दिखा पौराणिक महत्व
प्रदर्शनी के दौरान 60 मिनट की एक विशेष डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की जा रही है। इसमें योगिनियों के इतिहास, उनकी आध्यात्मिक ऊर्जा और पौराणिक महत्व को विस्तार से दर्शाया गया है। इस डॉक्यूमेंट्री का निर्माण स्वयं कलाकार ने किया है, जबकि निर्देशन डॉ. जैन जोसेफ ने किया है।
आत्मिक साधना का माध्यम बनी कला
डॉ. बीना की पहली प्रदर्शनी वर्ष 1998 में आयोजित हुई थी। वे बताती हैं कि हर पेंटिंग ने उनके व्यक्तित्व को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चौंसठ योगिनियों पर आधारित यह श्रृंखला उनके लिए केवल कला नहीं, बल्कि एक गहन आत्मिक साधना है। उनका मानना है कि इन दिव्य ऊर्जाओं ने उनके भीतर के भय, संशय और अतिचिंतन को दूर कर आत्मविश्वास, संतुलन और आंतरिक शांति प्रदान की है।
यह प्रदर्शनी कला और अध्यात्म के संगम का अद्भुत उदाहरण बनकर जयपुर के कला प्रेमियों को एक अलग अनुभव दे रही है।


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