जयपुर (कुकस),
जयपुर-दिल्ली हाईवे स्थित शंकरा ग्रुप ऑफ इन्स्टीट्यूशन्स के प्रांगण में मंगलवार को ‘राष्ट्रीय युवा महोत्सव’ का रंगारंग शुभारंभ हुआ। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की मूल भावना को समर्पित इस महोत्सव में खेल, संस्कृति और साहित्य की त्रिवेणी देखने को मिली। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि Jagadguru Ramanandacharya Rajasthan Sanskrit University के कुलपति Prof. Madan Mohan Jha ने ध्वजारोहण कर 37 विभिन्न स्पर्धाओं का विधिवत उद्घाटन किया।
शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं: प्रो. मदन मोहन झा
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. झा ने नई शिक्षा नीति की प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास है। उन्होंने कहा कि खेल, संस्कृति और साहित्य छात्रों के भीतर आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता विकसित करते हैं।
‘उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुंबकम्’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से संकीर्ण सोच का त्याग कर पूरे विश्व को परिवार मानने का आह्वान किया।
हजारों युवाओं में भरा जोश: डॉ. संत कुमार चौधरी
संस्थान के अध्यक्ष Dr. Sant Kumar Chaudhary ने अपने ओजस्वी संबोधन में महोत्सव को ‘लघु भारत’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा,
“जब उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम के युवा एक ही मैदान पर एकत्र होते हैं, तो वह केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का उत्सव बन जाता है। हमारा उद्देश्य ऐसे तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करना है, जो अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से गहराई से जुड़े हों।”
विविधता में एकता का अनूठा संगम
महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों—उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात सहित दक्षिण भारतीय राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं। कुल 37 प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, नृत्य-संगीत, नाटक तथा साहित्यिक वाद-विवाद जैसी स्पर्धाएं शामिल हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में Ranjit Kumar, रीजनल हेड, Union Bank of India ने युवाओं को वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग जागरूकता और कॉर्पोरेट अनुशासन के महत्वपूर्ण सूत्र बताए।
मुख्य आकर्षण और संदेश
पूरा परिसर तिरंगे के रंगों और सांस्कृतिक विविधता से सराबोर नजर आया। विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी परंपरागत वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
महोत्सव का मुख्य उद्देश्य युवाओं को विकसित भारत की जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। आयोजन के पहले ही दिन छात्रों में उत्साह और ऊर्जा का विशेष संचार देखने को मिला, जो आने वाले दिनों में और अधिक रंग जमाने का संकेत दे रहा











