Shivraj Singh Chouhan ने जयपुर में देश की पहली लाइव-ट्रैकिंग, GPS-सक्षम रेट-कंट्रोल्ड प्रिसीजन स्प्रेयर मशीन लॉन्च की




जयपुर, राजस्थान।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने आज जयपुर स्थित National Institute of Agricultural Marketing (NIAM) में देश की पहली लाइव-ट्रैकिंग, GPS-सक्षम और रेट-कंट्रोल्ड प्रिसीजन स्प्रेयर मशीन का औपचारिक शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से कृषि विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

“चार्ली प्रिसीजन स्प्रेयर” का डिजाइन और निर्माण Jagatsukh Industries Pvt Ltd ने अपने निदेशक Jagatjit Singh Passi के नेतृत्व में किया है। यह मशीन विशेष रूप से भारतीय कृषि परिस्थितियों और विविध फसली पैटर्न को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।


यह अत्याधुनिक मशीन GPS आधारित लाइव ट्रैकिंग प्रणाली से लैस है, जिससे खेत में हो रहे कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव है। इसकी ऑटोमैटिक रेट-कंट्रोल तकनीक फसल की आवश्यकता के अनुसार रसायनों का सटीक छिड़काव सुनिश्चित करती है, जिससे रसायनों की बर्बादी और लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।


समान बूंद वितरण प्रणाली (यूनिफॉर्म ड्रॉपलेट डिस्ट्रीब्यूशन) के कारण फसल पर समान रूप से छिड़काव होता है, जिससे कीट एवं रोग नियंत्रण बेहतर होता है और उत्पादकता में वृद्धि होती है। साथ ही, यह फसलों में अधिकतम अवशेष स्तर (MRL) को कम करने में सहायक है, जिससे सुरक्षित खाद्य उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित होता है।


उच्च ग्राउंड क्लीयरेंस, मजबूत चेसिस और उपयोगकर्ता-अनुकूल नियंत्रण प्रणाली से युक्त यह मशीन कपास, गन्ना, मक्का, धान सहित विभिन्न कतारबद्ध फसलों के लिए उपयुक्त है, बिना फसल को नुकसान पहुंचाए। यह श्रम पर निर्भरता कम करती है और महत्वपूर्ण छिड़काव अवधि में समय की बचत करती है।

साथ ही, यह प्रिसीजन स्प्रेयर ऑपरेटर की सुरक्षा को बढ़ाता है, क्योंकि यह रसायनों के सीधे संपर्क को न्यूनतम करता है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अधिक छिड़काव और स्प्रे ड्रिफ्ट को रोकता है।

यह तकनीक किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), कस्टम हायरिंग सेंटर (CHCs) और प्रगतिशील किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। यह लॉन्च भारत में स्मार्ट, डिजिटल और सतत कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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