जयपुर में कंपनी अधिनियम, 2013 के नए बदलावों और अपडेट्स पर सेमिनार, विशेषज्ञों ने दिए अहम सुझाव

 


जयपुर। भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) के जयपुर चैप्टर की ओर से कंपनी अधिनियम, 2013 में हुए हालिया नियामकीय बदलावों और नवीनतम अपडेट्स पर एक विस्तृत सेमिनार आयोजित किया गया। टोंक रोड स्थित एक होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कंपनी सेक्रेटरी प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

जयपुर चैप्टर के चेयरमैन सीएस सुमित कुमार श्योराण ने बताया कि सेमिनार का उद्देश्य प्रतिभागियों को कंपनी अधिनियम, 2013 में हुए नए संशोधनों, बदलते नियमों और उनके व्यावहारिक प्रभावों से अवगत कराना था, ताकि वे अपने प्रोफेशनल कार्य में इनका बेहतर तरीके से अनुपालन कर सकें।



कार्यक्रम का शुभारंभ आईसीएसआई के अध्यक्ष पवन जी. चांडक द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर आईसीएसआई के पूर्व अध्यक्ष मनीष गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र के बाद आयोजित इंटरएक्टिव सेशन में प्रतिभागियों ने कंपनी कानून से जुड़े अपने प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समाधान किया गया।

सेमिनार के तकनीकी सत्रों में कंपनी अधिनियम, 2013 के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। पहले तकनीकी सत्र में राहुल परसरामपुरिया ने हालिया नियामकीय बदलावों और उनके अनुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। वहीं, दूसरे सत्र में विनित चौधरी ने नए अपडेट्स, कानूनी प्रावधानों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में उनके प्रभाव को विस्तार से समझाया।

इसके बाद आयोजित पैनल चर्चा में वार्षिक फाइलिंग, अन्य वैधानिक फाइलिंग से जुड़े मुद्दों, डिजिटल कंप्लायंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स तथा विभिन्न सॉफ्टवेयर टूल्स के उपयोग पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस पैनल में मनोज माहेश्वरी, संदीप जैन, दिवेश गोयल और जतीन सिंघल ने अपने अनुभव साझा किए और प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए।



विशेषज्ञों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बदलते कॉर्पोरेट परिवेश में कंपनी अधिनियम के नए प्रावधानों की जानकारी और समय-समय पर होने वाले अपडेट्स से अवगत रहना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक दौर में एआई और डिजिटल टूल्स का उपयोग कंप्लायंस प्रक्रिया को अधिक सरल, प्रभावी और पारदर्शी बना रहा है।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भागीदारी निभाई और सेशन को इंटरएक्टिव एवं ज्ञानवर्धक बनाया। इस तरह के सेमिनार प्रोफेशनल्स को न केवल अपडेट रहने में मदद करते हैं, बल्कि उन्हें अपने कौशल को निखारने और कॉर्पोरेट क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को तैयार करने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

समापन पर आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। यह सेमिनार कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी साबित हुआ, जिसने उन्हें कंपनी कानून के नए आयामों को समझने और बेहतर अनुपालन की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया।

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