जयपुर, 17 अप्रैल। गौतम कुमार दक, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने जवाहर कला केन्द्र के दक्षिण परिसर में ‘राष्ट्रीय सहकार मसाला मेला-2026’ का विधिवत शुभारम्भ किया। यह मेला 17 से 26 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें उपभोक्ताओं को एक ही स्थान पर गुणवत्तापूर्ण और शुद्ध मसाले व अन्य उत्पाद उपलब्ध होंगे।
उद्घाटन अवसर पर शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा भी मौजूद रहे। मंत्री ने दीप प्रज्ज्वलन एवं फीता काटकर मेले का शुभारम्भ किया
उन्होंने कहा कि सहकारिता का मूल मंत्र ‘एक सबके लिए, सब एक के लिए’ इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से साकार होता है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने में सहकारी आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।
मंत्री ने जानकारी दी कि इस मेले की सफलता से प्रेरित होकर पहली बार संभाग स्तर पर सहकार मेलों का सफल आयोजन किया गया है और अब जिला स्तर पर भी ऐसे मेलों का आयोजन किया जाएगा।
मेले के प्रमुख आकर्षणों में देशभर के प्रसिद्ध मसाले और क्षेत्रीय उत्पाद शामिल हैं—केरल की काली मिर्च और लौंग, तमिलनाडु (इरोड) की हल्दी और दालचीनी, कश्मीर की केसर और ड्राई फ्रूट्स, पंजाब के चावल और रेडी-टू-ईट उत्पाद, मध्य प्रदेश का सिहोरी गेहूं, मथानिया की लाल मिर्च, रामगंजमंडी और बारां का धनिया, नागौर का जीरा और कसूरी मैथी, जालोर की इसबगोल, सिरोही की सौंफ, प्रतापगढ़ की हींग, चित्तौड़गढ़ की अजवाइन, पुष्कर का गुलकंद, नाथद्वारा की ठंडाई, भुसावर का अचार, राजसमंद का शर्बत, सोजत की मेहंदी, डूंगरपुर का आम पापड़, झाड़ोल की अरहर दाल और बीकानेर के पापड़ विशेष रूप से लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
आगंतुकों के लिए मेले में प्रतिदिन लकी ड्रॉ और समापन अवसर पर मेगा बंपर ड्रॉ का आयोजन भी रखा गया है। साथ ही हर दिन विभिन्न संभागों के लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो मेले को और भी आकर्षक बनाती हैं।
उद्घाटन के बाद मंत्री एवं अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन कर उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता की जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि यह मेला वर्ष 2003 से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है और जयपुरवासियों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
कार्यक्रम में राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी सहित सहकारिता विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में सहकारजन उपस्थित रहे।




