राजस्थानी विभाग की मांग को लेकर 6 दिन भूख हड़ताल, साहित्यकारों का समर्थन

 


जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति विभाग की स्थापना की मांग को लेकर छात्रा पूजा शेखावत और छात्र लोकेन्द्र सिंह के नेतृत्व में 6 दिनों तक भूख हड़ताल की गई। यह आंदोलन विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा की उपेक्षा, अत्यधिक शुल्क और स्वतंत्र विभाग के अभाव के विरोध में किया गया।

छात्रों का कहना है कि राज्य के सबसे बड़े विश्वविद्यालय में अब तक राजस्थानी भाषा का स्वतंत्र विभाग स्थापित नहीं होना चिंताजनक है, जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में यह पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। वर्ष 1975 में स्थापित अध्ययन केंद्र केवल शोध कार्य के लिए बनाया गया था, लेकिन यहां नियमित अध्ययन के नाम पर करीब 55 हजार रुपये शुल्क लिया जा रहा है, जो अन्य भाषा विभागों की तुलना में काफी अधिक है।



इसी मुद्दे को लेकर जवाहर कला केंद्र में राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्षरत कवयित्री सीमा राठौड़ ‘शैलजा’ ने साहित्यकारों और मीडिया के साथ परिचर्चा आयोजित की। इसमें विभिन्न साहित्यकारों और मीडिया प्रतिनिधियों ने छात्रों की मांग को जायज बताते हुए समर्थन दिया।


साहित्यकार कल्याण सिंह शेखावत राजनोता, भगवान सहाय पारीक, कैलाशदान कविया, प्रहलाद कुमावत ‘चंचल’ सहित कई वक्ताओं ने कहा कि राजस्थानी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय में स्वतंत्र विभाग की स्थापना आवश्यक है।

भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि छात्रों के हितों की अनदेखी न की जाए और जल्द से जल्द राजस्थानी विभाग खोला जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब तक लगातार प्रयास जारी हैं और विभाग खुलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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