पहले कदम से ही भविष्य निर्माण: प्री-स्कूल शिक्षा से गढ़े जा रहे कल के लीडर्स दीपिका शेखावत, सेंटर हेड, किडज़ी मुरलीपुरा, जयपुर की पहल से ‘पेंटेमाइंड’ मॉडल बना नई दिशा

 


जयपुर। आज के दौर में जहां प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और जीवन की अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं, वहां बच्चों की सफलता की नींव अब उच्च या प्राथमिक शिक्षा से नहीं, बल्कि प्री-स्कूल स्तर से ही रखी जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों और शोधों के अनुसार, जीवन के पहले छह वर्ष बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी अवधि में बच्चे का दिमाग तेजी से विकसित होता है और उसकी सोच, व्यक्तित्व तथा व्यवहार की बुनियाद तैयार होती है।



ऐसे में प्री-स्कूल शिक्षा की भूमिका बेहद अहम हो जाती है, जो बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करती है।

सिर्फ ABC नहीं, जीवन कौशल की नींव

अक्सर प्री-स्कूल को केवल अक्षर और अंक सिखाने का स्थान माना जाता है, लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक है। यह एक ऐसा सुनियोजित वातावरण होता है, जहां बच्चे खेल-खेल में सीखते हुए अपने संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव), सामाजिक, भावनात्मक और संवाद कौशल विकसित करते हैं।






यहां बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वतंत्रता की भावना विकसित होती है, जो उन्हें आगे की शिक्षा और जीवन के लिए पूरी तरह तैयार करती है।

किडज़ी का ‘पेंटेमाइंड’ मॉडल: समग्र विकास की सोच

एशिया के अग्रणी प्री-स्कूल नेटवर्क में शामिल किडज़ी ने अपने बाल-केंद्रित दृष्टिकोण से प्रारंभिक शिक्षा को नई पहचान दी है। इसके मूल में ‘पेंटेमाइंड’ की अवधारणा है, जो बच्चों के पांच महत्वपूर्ण मानसिक पहलुओं के विकास पर आधारित है।






इसमें—

एम्पैथेटिक माइंड (संवेदनशीलता और रिश्तों की समझ),

कांशियस माइंड (अनुशासन और मूल्यों का विकास),

फोकस्ड माइंड (एकाग्रता और सीखने की क्षमता),

एनालिटिकल माइंड (तार्किक सोच और समस्या समाधान),

और इन्वेंटिव माइंड (रचनात्मकता और नवाचार) शामिल हैं।

यह मॉडल बच्चों को केवल पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि भावनात्मक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से भी मजबूत बनाता है।




किडज़ी मुरलीपुरा: उत्कृष्टता की नई मिसाल

जयपुर के किडज़ी मुरलीपुरा में इस सोच को सेंटर हेड दीपिका शेखावत के नेतृत्व में सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। यहां बच्चों के लिए एक सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण तैयार किया गया है, जहां वे स्वाभाविक रूप से सीखते और आगे बढ़ते हैं।



प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उन्हें विशेष ध्यान दिया जाता है। अनुभवी शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं, जो बच्चों को प्रेरित करते हुए उनके सर्वांगीण विकास में सहयोग करते हैं।



स्टोरीटेलिंग, सेंसरी एक्टिविटीज़ और अन्य गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से बच्चों के ‘पांचों माइंड’ को सक्रिय किया जाता है।



आज के बच्चों में कल के लीडर्स की झलक

किडज़ी मुरलीपुरा में शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, मूल्यों के विकास और जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।

यहां बच्चे आत्मविश्वास के साथ खुद को व्यक्त करना, स्वतंत्र रूप से सोचने की क्षमता विकसित करना, और सामाजिक संबंधों को समझना सीखते हैं—जो उन्हें भविष्य के लीडर्स बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।





प्री-स्कूल शिक्षा बच्चे के पूरे भविष्य की नींव होती है, इसलिए सही प्री-स्कूल का चयन हर अभिभावक के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है। किडज़ी मुरलीपुरा अपने समग्र और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ बच्चों को एक मजबूत आधार प्रदान कर रहा है।

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