जयपुर, 9 जून 2026।
भारत सरकार के वाणिज्य विभाग और एपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) द्वारा मंगलवार को जयपुर में “वैश्विक परिधान व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत बनाना: अवसर, चुनौतियां और आगे की राह” विषय पर क्षेत्रीय मीडिया संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत के परिधान निर्यात क्षेत्र की संभावनाओं, चुनौतियों और वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच जयपुर की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार अग्रिम कौशल ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक वस्त्र एवं परिधान विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 5F विजन—“फार्म टू फाइबर, फाइबर टू फैक्ट्री, फैक्ट्री टू फैशन और फैशन टू फॉरेन”—का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतिगत सुधारों ने भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत किया है।
उन्होंने बताया कि जयपुर राजस्थान के रेडीमेड गारमेंट निर्यात का लगभग 86 प्रतिशत योगदान देता है और देश के प्रमुख परिधान निर्यात क्लस्टर्स में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। जयपुर की समृद्ध वस्त्र विरासत, कुशल कारीगरों, मजबूत एमएसएमई नेटवर्क और आधुनिक विनिर्माण क्षमता ने इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशेष स्थान दिलाया है।
अग्रिम कौशल ने कहा कि प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, पीएम मित्रा मेगा टेक्सटाइल पार्क, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन तथा हाल ही में शुरू किए गए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (EPM) जैसी पहलें देश के वस्त्र और परिधान उद्योग को नई गति प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के विस्तार से भारतीय निर्यातकों को नए बाजारों तक पहुंच मिलेगी और निर्यात वृद्धि को बल मिलेगा।
कार्यक्रम में राजस्थान गारमेंट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (GEAR) के अध्यक्ष एवं AEPC की कार्यकारी समिति के सदस्य रक्षित पोद्दार ने कहा कि जयपुर के निर्यातकों ने समय के साथ वैश्विक बाजार की मांगों के अनुरूप स्वयं को ढाला है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्योग ने पारंपरिक हस्तशिल्प और आधुनिक डिजाइन को जोड़कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
AEPC की कार्यकारी समिति के सदस्य असीम कुमार ने कहा कि परिधान उद्योग रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा अर्जन और समावेशी आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उन्होंने कौशल विकास, तकनीकी उन्नयन, सतत उत्पादन और बेहतर लॉजिस्टिक्स पर निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
संवाद के दौरान विशेषज्ञों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हो रहे बदलावों पर भी चर्चा की। उनका मानना था कि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड अब अपने सोर्सिंग नेटवर्क में विविधता ला रहे हैं और ऐसे समय में भारत एक विश्वसनीय तथा प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।
कार्यक्रम में प्रस्तुत विस्तृत प्रेजेंटेशन में जयपुर की निर्यात क्षमता को और मजबूत बनाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास, लॉजिस्टिक्स दक्षता, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार, उत्पाद विविधीकरण, सतत विकास और एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने की रणनीतियों पर जोर दिया गया। साथ ही महिला उद्यमियों और नए निर्यातकों को विशेष सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
AEPC ने कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार और उद्योग जगत के साथ मिलकर निर्यात वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक परिधान मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जयपुर अपनी मजबूत औद्योगिक क्षमता, कुशल कार्यबल और विश्वप्रसिद्ध वस्त्र विरासत के दम पर इस विकास यात्रा का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।
कार्यक्रम का समापन AEPC की कार्यकारी समिति के सदस्य रवि पोद्दार के धन्यवाद ज्ञापन और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद सत्र के साथ हुआ।

