अग्रवाल शिक्षा समिति चुनाव पर उठे सवाल, प्रत्याशियों ने 27 सितंबर के मतदान के बहिष्कार की घोषणा मतदाता सूची, नामांकन प्रक्रिया और चुनाव समिति की पारदर्शिता पर लगाए अनियमितताओं के आरोप

 



जयपुर। अग्रवाल शिक्षा समिति के त्रैवार्षिक चुनाव 2026-29 को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रत्याशी नरसिंह गुप्ता एडवोकेट और मदन मोहन मित्तल ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए 27 सितंबर को होने वाले मतदान के बहिष्कार की घोषणा की है। दोनों प्रत्याशियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता सूची, नामांकन प्रक्रिया, चुनाव समिति की कार्यप्रणाली और चुनाव की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए।

प्रत्याशियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां हैं। उनके मुताबिक जयपुर शहर में रहने वाले कई मतदाताओं के नाम और मोबाइल नंबर सूची में नहीं हैं, जबकि जयपुर से बाहर, दूसरे राज्यों और विदेशों में रहने वाले लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए हैं। उनका कहना है कि बाहर रहने वाले सदस्यों के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें जयपुर आकर मतदाता सूची में नाम देखने और नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

पांच दिन की प्रक्रिया पर सवाल

नरसिंह गुप्ता और मदन मोहन मित्तल ने चुनाव अधिसूचना जारी होने से लेकर नामांकन और नाम वापसी तक के लिए दिए गए समय पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के लिए महज पांच दिन का समय दिया गया।

उन्होंने नामांकन के लिए जमा कराई जाने वाली 31 हजार रुपये की राशि की मूल रसीद वापस जमा कराने की व्यवस्था को भी अस्पष्ट बताया। प्रत्याशियों का कहना है कि नामांकन पत्र और राशि जमा कराने की स्पष्ट पावती उपलब्ध नहीं कराई गई। साथ ही नाम वापसी के बाद भी 21 सितंबर तक प्रत्याशियों की अधिकृत सूची जारी नहीं करने और वैध मतपत्र का प्रारूप प्रत्याशियों को उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया गया।



पुष्पेंद्र गुप्ता के मामले का भी उठाया मुद्दा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में साधारण सदस्य पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता के मामले का भी उल्लेख किया गया। आरोप लगाया गया कि पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता एग्जीक्यूटिव के लिए नामांकन फॉर्म भरने जा रहे थे, लेकिन उन पर दबाव बनाया गया और उन्हें फॉर्म भरने से रोकने का प्रयास किया गया।

आरोप के अनुसार पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता ने 5,100 रुपये देकर फॉर्म और 3,100 रुपये देकर मतदाता सूची खरीदी थी। फॉर्म भरने से रोके जाने और समिति की नीतियों से नाराज होकर वे स्टे लेने के लिए कोर्ट गए। दोनों प्रत्याशियों का आरोप है कि इसके बाद शिक्षा समिति की वर्तमान शासकीय परिषद के सदस्यों की ओर से उन पर दबाव और कथित प्रलोभन दिया गया। उनके अनुसार, इसी घटनाक्रम के बीच पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में अपना केस वापस ले लिया।

CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग

प्रत्याशियों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता स्पष्ट करने के लिए 16 सितंबर दोपहर 2 बजे से 18 सितंबर शाम 3 बजे तक शिक्षा समिति कार्यालय के CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

उनका आरोप है कि सभी 33 प्रत्याशियों के नामांकन फॉर्म कार्यालय से लेने और कार्यालय में स्वयं जमा कराने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। ऐसे में CCTV फुटेज सामने आने से नामांकन प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

चुनाव समिति को लेकर भी सवाल

प्रत्याशियों ने चुनाव समिति की संरचना को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि वर्तमान शासकीय परिषद के एक सदस्य के पुत्र को चुनाव समिति में शामिल किया गया है। इसके अलावा संस्था का कार्यकाल समाप्त होने के करीब सात महीने बाद जल्दबाजी में चुनाव कराने और चुनाव समिति का कोई अधिकृत कार्यालय नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए।

उन्होंने चुनाव समिति के सदस्यों की पूर्ण समय उपलब्धता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

बाहर रहने वाले सदस्यों के लिए व्यवस्था पर सवाल

नरसिंह गुप्ता और मदन मोहन मित्तल ने जयपुर से बाहर रहने वाले सदस्यों के लिए नामांकन, नाम वापसी, मतपत्र जारी करने और रजिस्टर्ड डाक से मतपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए।

उनका कहना है कि बाहर रहने वाले सदस्यों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था नहीं होने से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सदस्यों के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं।

अध्यक्ष-सचिव की कार्यप्रणाली पर भी आरोप

दोनों प्रत्याशियों ने वर्तमान अध्यक्ष और सचिव पर आम सदस्यों के बीच कथित भेदभाव पैदा करने के आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 13 वर्षों से सचिव पद पर बने व्यक्ति अपने लोगों को शासकीय परिषद में शामिल कर रहे हैं और नए सदस्यों को अवसर नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने संस्था में कथित गुटबाजी और कार्यालय में बाउंसर नियुक्त किए जाने का मुद्दा भी उठाया। आरोप लगाया गया कि सदस्यों को नामांकन प्रक्रिया के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ा।

प्रत्याशियों ने कहा कि अग्रवाल समाज की शैक्षणिक संस्थाओं का स्तर और भविष्य समाज के लिए महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए।

दोनों प्रत्याशियों ने 27 सितंबर को होने वाले चुनाव के बहिष्कार की घोषणा करते हुए समाज के सदस्यों से भी मतदान का बहिष्कार करने की अपील की।


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