जयपुर, 24 जनवरी 2026।
मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयागराज संगम में ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी को संगम स्नान से रोके जाने तथा साधु-संतों के साथ कथित मारपीट की घटना को लेकर देशभर में आक्रोश व्याप्त है। इस गंभीर प्रकरण के विरोध में गौमाता राष्ट्रमाता अभियान एवं गो-संसद से जुड़े पदाधिकारियों ने शनिवार को जवाहर कला केंद्र, जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में इसे सनातन परंपरा का अपमान और संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया।
गौमाता राष्ट्रमाता अभियान के प्रभारी एवं गौ सेवादिश – पश्चिम भारत बाबूलाल जांगिड ने कहा कि शंकराचार्य जी कोई राजनीतिक पदाधिकारी नहीं, बल्कि एक प्राचीन सनातन मठ के पीठाधीश्वर हैं। उन्हें बिना किसी लिखित आदेश, निषेधाज्ञा अथवा स्पष्ट कारण के संगम स्नान से रोकना पूरी तरह मनमाना और असंवैधानिक है। यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सनातन परंपरा के सम्मान से जुड़ा है।
गो-संसद के प्रदेश सह प्रभारी, राजस्थान ताराचंद कोठारी ने बताया कि प्रशासन ने ‘प्रोटोकॉल’ और ‘भीड़ के खतरे’ का हवाला देकर शंकराचार्य जी को संगम क्षेत्र में प्रवेश से रोका, जबकि उपलब्ध वीडियो फुटेज एवं प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उस समय कोई असामान्य भीड़ नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उसी दौरान अन्य धार्मिक समूहों को संगम स्नान की अनुमति दी गई, जो प्रशासन की भेदभावपूर्ण नीति को दर्शाता है।
गो-संसद के प्रदेश सह सचिव, राजस्थान देवकीनंदन पुरोहित ने कहा कि शंकराचार्य जी को एक समय पर अकेला छोड़ दिया गया तथा बिना वर्दी वाले अज्ञात लोगों द्वारा घेरकर किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं गरिमा का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य जी के शिष्यों—जिनमें महिलाएं, वृद्ध एवं नाबालिग शामिल थे—के साथ दुर्व्यवहार एवं बल प्रयोग किया गया।
प्रेस वार्ता में गो-संसद के प्रतिनिधियों ने वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि एक वर्दीधारी पुलिसकर्मी द्वारा एक साधु की चोटी पकड़कर उन्हें जमीन पर घसीटते हुए मारपीट किए जाने के दृश्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। वक्ताओं ने कहा कि साधु की चोटी पकड़ना केवल शारीरिक हिंसा नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं का जानबूझकर किया गया अपमान है, जिससे देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि संगम स्नान रोकने से संबंधित कोई भी लिखित आदेश या वैधानिक आधार अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 25 का प्रत्यक्ष उल्लंघन बताते हुए सरकार से पूरे प्रकरण में तत्काल जवाबदेही तय करने की मांग की।
प्रमुख मांगें
• शंकराचार्य जी, साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं के साथ हुई कार्रवाई पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण एवं बिना शर्त माफी।
• संगम स्नान रोकने से जुड़े सभी लिखित आदेश एवं निर्देश सार्वजनिक किए जाएं।
• वीडियो में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों को जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाए।
• पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
• सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग एवं वायरलेस लॉग सुरक्षित किए जाएं।
• संज्ञेय अपराध सिद्ध होने पर दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जाए।
• भविष्य में साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं के साथ ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
प्रेस वार्ता के अंत में गौमाता राष्ट्रमाता अभियान एवं गो-संसद के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी गई, तो 27 जनवरी 2026 को साधु-संतों एवं आमजन के साथ प्रतिकार यात्रा निकाली जाएगी। जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
इस अवसर पर गो-संसद जयपुर से सुरेंद्र सिंह अचलपुरा, योगेंद्र सिंह, संतलाल सैनी, पंडित गजानंद शर्मा, विनोद यादव, भारतीय गौ क्रांति मंच के प्रदेश अध्यक्ष ताराचंद कोठारी, प्रदेश उपाध्यक्ष भगवान लाल सेन, देवकीनंदन, आशीष मीणा तथा गौसेवक ओमप्रकाश सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।


