आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सानिध्य में जयपुर में पहली बार होगा विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव 5700 श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से किया चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान पूजन

 


जयपुर, 29 जनवरी।

साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में मानसरोवर स्थित शिप्रा पथ, वीटी रोड के हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड पर चल रहे आठ दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ के अंतर्गत रविवार, 1 फरवरी को जयपुर में पहली बार विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज जयपुर प्रवास समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद जैन एवं महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि यह महोत्सव विशेष रूप से 1 वर्ष से 25 वर्ष तक के वैवाहिक जीवन जी रहे दंपतियों के लिए आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में दंपतियों को आदर्श वैवाहिक जीवन, संयम, संस्कार, आपसी समन्वय और रिश्तों में मजबूती के सूत्र बताए जाएंगे। पुरुष प्रतिभागी सफेद वस्त्रों में एवं महिलाएं केसरिया साड़ी में सहभागी होंगी। महोत्सव हेतु नि:शुल्क ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से पंजीकरण किया जा रहा है।

चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

गुरुवार को आचार्य श्री ससंघ के सानिध्य में श्री श्री 1008 चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान का भव्य आयोजन हुआ। प्रतिष्ठाचार्य ब्र. ब्र. तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में अभिषेक, शांतिधारा एवं नवदेवता पूजन के पश्चात समुच्चय पूजा संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने अष्ट द्रव्यों से 146 अर्घ्य अर्पित किए और धर्म ध्वजाएं चढ़ाईं। इस दौरान लगभग 5700 श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जैन भजनों पर नृत्य करते हुए पूजा में भाग लिया



प्रवचन में आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा,

“जीवन में वाणी और व्यवहार में कभी हल्कापन नहीं आना चाहिए। बिना संयम और व्रतों के जीवन पशु समान है। संयमित जीवन ही सच्चा मानव जीवन है।”

उपाध्याय पियूष सागर महाराज ने कहा कि जीवन एक रेलगाड़ी के समान है, जिसे अनुशासन और समयबद्धता के साथ संयम के मार्ग पर चलाकर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

17 घंटे प्रतिदिन धर्म प्रभावना में संलग्न आचार्य श्री

समिति कोषाध्यक्ष कैलाश चंद छाबड़ा ने बताया कि आचार्य प्रसन्न सागर महाराज दो दिन के उपवास के पश्चात भी प्रतिदिन प्रातः 4 बजे से रात्रि 9 बजे तक लगातार 17 घंटे धर्म प्रभावना में संलग्न रहकर श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। 13 वर्षों बाद जयपुर में आयोजित यह महोत्सव जैन समाज के लिए ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।

पहली बार जयपुर में पूर्ण दिगम्बर जैन चतुर्विद संघ का सानिध्य

इस महायज्ञ की विशेषता यह है कि जयपुर में पहली बार किसी धार्मिक आयोजन में पूर्ण दिगम्बर जैन चतुर्विद संघ—आचार्य, उपाध्याय, मुनि, आर्यिका, क्षुल्लक-क्षुल्लिका सहित—का सानिध्य प्राप्त हो रहा है।

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, विधान पूजा, धर्मसभा तथा सायंकाल गुरु पूजा, प्रतिक्रमण, आनंद यात्रा एवं महाआरती का आयोजन किया जा रहा है।

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