सात दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ सम्पन्न 6000 से अधिक श्रद्धालुओं ने 1008 हवन कुंडों में मंत्रोच्चार के साथ दी पूर्णाहुति

 


जयपुर, 31 जनवरी।

मानसरोवर स्थित शिप्रा पथ वीटी रोड के हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड में 25 जनवरी से आयोजित सात दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महा अर्चना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान शनिवार को संपन्न हुआ। साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित श्री 1008 चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान के अंतर्गत विश्व कल्याण की कामना के साथ 1008 हवन कुंडों में सैकड़ों मंत्रों के उच्चारण के साथ पूर्णाहुति दी गई। महायज्ञ में 6000 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि चित्र से पहचान होती है और चारित्र से व्यक्तित्व की परख होती है। उन्होंने चारित्र शुद्धि को जीवन परिवर्तन का आधार बताते हुए कहा कि मन की शुद्धि से ही आत्मविकास संभव है। आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने कहा कि जिनका आचरण शुद्ध होता है, उनके विचार भी शुद्ध होते हैं, जबकि आचार्य शशांक सागर महाराज ने दिगम्बर जैन संतों की जीवन शैली को अनुकरणीय बताया।



विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने आचार्य संघ से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए कहा कि साधु-संतों के सत्संग और आशीर्वाद से ही जीवन में सही दिशा मिलती है तथा भारतीय संस्कृति की मूल पहचान आध्यात्मिक मूल्यों में निहित है।

समिति अध्यक्ष सुभाष चंद जैन एवं महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि उपाध्याय पियूष सागर महाराज के मार्गदर्शन एवं प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी तरुण भैय्या के निर्देशन में आयोजित चारित्र शुद्धि महामण्डल विधान का समापन विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ। इस दौरान गणाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज का 46वां दीक्षा दिवस भी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया।



रविवार, 1 फरवरी को जयपुर में पहली बार विवाह अणुव्रत संस्कार महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 1 से 25 वर्ष तक के वैवाहिक जीवन वाले दंपतियों को आदर्श, संयमित और संस्कारयुक्त जीवन के सूत्र बताए जाएंगे। दोपहर 1 बजे हाउसिंग बोर्ड ग्राउंड शिप्रा पथ से मीरामार्ग दिगम्बर जैन मंदिर तक श्रीजी की विशाल रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें आचार्य संघ, महिला मंडल, बैंड-बाजे एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।

समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों एवं बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन के माध्यम से विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव और चारित्र निर्माण का संदेश दिया गया।

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