जयपुर, 31 जनवरी।
जयपुर आर्ट वीक के तहत शहर एक जीवंत और सहभागितापूर्ण सांस्कृतिक मंच में तब्दील होता नजर आ रहा है। विभिन्न स्थलों पर आयोजित वॉक, वर्कशॉप, क्यूरेटर-नेतृत्वित टूर और सैटेलाइट इवेंट्स के माध्यम से दर्शकों को कला, पारिस्थितिकी, शिल्प, ध्वनि, स्मृति और समुदाय से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। सुबह की प्रकृति आधारित गतिविधियों से लेकर शाम के अनुभवात्मक भोजन तक, दिनभर कला के विविध रूप सामने आए।
इसी दौरान पाटी मुख्यालय में आयोजित सत्र ‘साउंड इज़ अ प्लेस टू: साउंड और कोड के माध्यम से स्थान और स्मृति की पड़ताल’ को नंदिति खिलनानी (अजायबघर) ने संचालित किया, जिसमें ध्वनि को एक सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभव के रूप में समझने पर जोर दिया गया। वहीं ग्रे स्पेस, सी-स्कीम में आयोजित ‘सेंट एंड मेमोरी: परफ़्यूम के ज़रिये छवि निर्माण’ वर्कशॉप में वृद्धि (ग्रे स्पेस) ने स्मृति, संवेदना और कहानी कहने की प्रक्रिया को व्यक्तिगत खुशबुओं के माध्यम से तलाशा।
दोपहर में सेंट्रल पार्क में आयोजित ‘इंट्रोडक्शन टू नैचुरल बिल्डिंग’ वर्कशॉप में मिट्टी और कॉब निर्माण तकनीकों से परिचय कराया गया। टाइनी फ़ार्म लैब के राघव कुमार और अंश कुमार द्वारा संचालित यह सत्र पर्यावरण-अनुकूल निर्माण और सहभागितापूर्ण सीख पर आधारित रहा।
जवाहर कला केंद्र स्थित म्यूज़ियम ऑफ मीनाकारी हेरिटेज में आयोजित क्यूरेटर वॉकथ्रू के माध्यम से जयपुर हेरिटेज फ़ाउंडेशन ने शहर की प्रसिद्ध मीनाकारी परंपरा और उसके ऐतिहासिक से समकालीन विकास पर प्रकाश डाला। इसके बाद ‘रीथ्रेड: भट्ट महिला कलाकारों के साथ स्वयं-चित्र कठपुतली निर्माण’ कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें पुनः उपयोग, आत्मकथा और सांस्कृतिक निरंतरता के विषयों पर आधारित कठपुतली निर्माण कराया गया।
इसके अतिरिक्त सेंट्रल पार्क में चार प्रदर्शनियों का क्यूरेटर-नेतृत्वित वॉकथ्रू आयोजित किया गया, जहां पाटी टीम ने सार्वजनिक कला और शहरी परिदृश्य के आपसी संबंधों को रेखांकित किया। दिन का समापन सम, जयपुर में आयोजित सैटेलाइट इवेंट ‘दावतें’ से हुआ, जिसे तारी ने प्रस्तुत किया। यह अनुभवात्मक दस्तरख़्वान शाही रसोई और घरेलू परंपराओं से प्रेरित रहा, जहां भोजन, स्मृति और संवाद एक साझा सांस्कृतिक अनुभव के रूप में सामने आए।
विविध कार्यक्रमों के माध्यम से जयपुर आर्ट वीक कला को एक जीवंत, सुलभ और सामूहिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जो शहर की पारिस्थितिकी, शिल्प परंपराओं, सार्वजनिक स्थलों और साझा स्मृतियों से गहराई से जुड़ा है।





