जयपुर, 25 जनवरी।
प्रिंसेस दीया कुमारी फाउंडेशन (पीडीकेएफ) द्वारा आयोजित पीडीकेएफ आर्टिज़न्स कलेक्टिव के दूसरे संस्करण का समापन सिटी पैलेस, जयपुर में भव्य और विचारोत्तेजक कार्यक्रमों के साथ हुआ। समापन दिवस पर “यूथ ऐज़ एजेंट्स ऑफ चेंज: एक्टिविज़्म, एडवोकेसी और क्राफ्ट” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई।
इस सत्र में डिजिटल क्रिएटर, लेखिका और ग्लोबल एडवोकेट प्राजक्ता कोली ने टेक्सटाइल डिज़ाइनर और क्रिएटिव कंसल्टेंट रोसन्ना फाल्कनर के साथ संवाद किया। चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि युवाओं में कम होती ध्यान देने की क्षमता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सार्थक विचारों को स्पष्टता और उद्देश्य के साथ प्रस्तुत करने का अवसर है। वक्ताओं ने बताया कि सरल, स्पष्ट स्टोरीटेलिंग और संक्षिप्त डिजिटल फॉर्मेट किस तरह कारीगरों की कहानियों को युवा दर्शकों से प्रभावी और प्रामाणिक रूप से जोड़ सकते हैं।
पीडीकेएफ के सस्टेनेबिलिटी और समावेशन से जुड़े प्रयासों पर बात करते हुए प्राजक्ता कोली ने कहा कि जागरूक युवा क्रिएटर्स और उपभोक्ता जिम्मेदार स्टोरीटेलिंग और सोच-समझकर किए गए विकल्पों के ज़रिए कारीगर समुदायों को सशक्त बना सकते हैं। सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि ईमानदारी और सम्मान पर आधारित प्रयास, अल्पकालिक ट्रेंड्स के बजाय दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देते हैं।
‘इंट्रोडक्शन टू मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशंस’ पर वर्कशॉप
फेडरेशन ऑफ राजस्थान हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स (फोरहेक्स) द्वारा ‘इंट्रोडक्शन टू मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशंस’ विषय पर एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वर्कशॉप का उद्देश्य कारीगरों को अपने उत्पादों की प्रभावी मार्केटिंग और नेटवर्किंग के लिए व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
वर्कशॉप का संचालन फोरहेक्स की सीईओ सोनल चित्रांशी ने किया, जिन्होंने ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन और मार्केट आउटरीच से जुड़ी उपयोगी रणनीतियां साझा कीं। इस अवसर पर नीरजा की संस्थापक लीला बोर्डिया ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में कारीगरों को उत्पादन के साथ-साथ मार्केटिंग कौशल से भी सशक्त करना आवश्यक है, ताकि वे सस्टेनेबल विकास और व्यापक बाजार तक पहुंच बना सकें। कार्यक्रम में फोरहेक्स के अध्यक्ष रवि उतमानी भी उपस्थित रहे।
‘क्राफ्ट ऐज़ ए कल्चरल आर्काइव’ पर सत्र
‘क्राफ्ट ऐज़ ए कल्चरल आर्काइव’ सत्र में वक्ताओं ने कहा कि भारतीय शिल्प केवल उत्पाद नहीं, बल्कि स्मृति, पहचान और जीवन अनुभवों का जीवंत संग्रह हैं। स्टोरीटेलिंग को कारीगर, डिज़ाइनर और उपभोक्ता के बीच एक सेतु के रूप में प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि पारदर्शिता, निर्माण प्रक्रिया और उत्पत्ति की जानकारी शिल्प उत्पादों में भावनात्मक और सांस्कृतिक मूल्य जोड़ती है।
पैनल में बदलते उपभोक्ता व्यवहार, विशेष रूप से युवा वर्ग की उस सोच पर चर्चा हुई, जो अर्थपूर्ण और प्रामाणिक रचनाओं की तलाश करता है। स्थान, तकनीक और लोगों से जुड़ी कहानियों को सामने लाकर स्टोरीटेलिंग के महत्व को रेखांकित किया गया।
विविध प्रस्तुतियों के साथ कलेक्टिव का समापन
समापन दिवस पर ‘स्पोकन वर्ड पोएट्री इन मूवमेंट’ नामक प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग प्रस्तुति दी गई। एनजीओ इंडियन वीमेन इम्पैक्ट से जुड़े बच्चों ने शॉर्ट स्टोरी प्रस्तुति दी, जिसके बाद हुमराहा की संस्थापक नंदिनी तांबी ने बच्चों जानवी और शिव के साथ संवाद किया।.
कार्यक्रम के अंतिम दिन आगंतुकों ने संगीत, नृत्य, स्टोरीटेलिंग और हस्तशिल्प की समृद्ध विरासत का अनुभव किया। कलेक्टिव का समापन विशाखा सराफ द्वारा घूमर नृत्य, टेटसेओ सिस्टर्स द्वारा नागालैंड के लोक संगीत की प्रस्तुति और नाइट बाज़ार अनुभव के साथ हुआ।
गौरतलब है कि पीडीकेएफ आर्टिज़न्स कलेक्टिव की संकल्पना जयपुर की प्रिंसेस गौरवी कुमारी द्वारा की गई। यह आयोजन एशियन एनर्जी सर्विसेज़ एवं ऑयलमैक्स द्वारा प्रस्तुत और सहज द्वारा प्रायोजित था।
कार्यक्रम के हॉस्पिटैलिटी पार्टनर द लीला, इंस्टीट्यूशन पार्टनर आईआईसीडी, वर्कशॉप पार्टनर स्टूडियो बेरो, नॉलेज पार्टनर फोरहेक्स, रेडियो पार्टनर रेड एफएम 93.5, ट्रैवल पार्टनर राजस्थान रूट्स और एसोसिएट पार्टनर जयपुर विरासत फाउंडेशन रहे।





