जयपुर, 30 जनवरी।
जयपुर आर्ट वीक के चौथे दिन शहर में कला, संस्कृति और रचनात्मक प्रयोगों का जीवंत संगम देखने को मिला। सुबह से शाम तक आयोजित विविध कार्यशालाओं, पैनल चर्चाओं और स्टूडियो विज़िट्स में कलाकारों, विद्यार्थियों और कला प्रेमियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।
दिन की शुरुआत यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर आयोजित ‘द स्ट्रीट ऐज़ स्टूडियो’ फोटोवॉक से हुई। गोलचा सिनेमा से प्रारंभ हुई इस अनूठी कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फोटोग्राफर जेरोम डे परलिंघी ने प्रतिभागियों को सार्वजनिक स्थलों पर पोर्ट्रेट फोटोग्राफी की बारीकियों से अवगत कराया। श्वेत-श्याम फोटोग्राफी के माध्यम से शहरी जीवन, मानवीय संवेदनाओं और सार्वजनिक संवाद को समझने का अवसर मिला।
दिन के मध्य सत्रों में पिंक सिटी स्टूडियो में आयोजित ‘मिनिएचर पेंटिंग: प्रैक्टिस, प्रोसेस एंड डायलॉग’ ने विशेष आकर्षण का केंद्र बनाया। कलाकार रियाज़ उद्दीन और पास्कल उंगरर ने समकालीन मिनिएचर पेंटिंग की प्रक्रिया, विचार और तकनीकों पर विस्तृत संवाद किया। वहीं घनेराव हाउस में आयोजित स्टूडियो विज़िट के दौरान प्रतिभागियों को कलाकार रोहिणी सिंह के रचनात्मक संसार से रूबरू होने का अवसर मिला।
.इसी क्रम में राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यशाला ‘पोर्टफोलियो बिल्डिंग: फाउंडेशन ऑफ़ ए प्रोफेशनल आर्ट प्रैक्टिस’ में उभरते कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय अवसरों, आर्टिस्ट स्टेटमेंट और पेशेवर प्रस्तुति के महत्वपूर्ण पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया गया। इस सत्र का संचालन जिम रैमर और राधा दत्ता ने किया।.
शाम के सत्रों में जवाहर कला केंद्र स्थित अलंकार गैलरी में ‘एनालॉग इंटरैक्शन विद लाइट आर्ट’ कार्यशाला का आयोजन हुआ, जहां कलाकार अंश कुमार ने लाइट और प्रोजेक्शन मैपिंग को एक रचनात्मक माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। वहीं राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित पैनल चर्चा ‘एआई के दौर में फोटोग्राफी और आलोचना’ में कला और तकनीक के बदलते संबंधों पर सार्थक विमर्श हुआ। पैनल में जेरोम डे परलिंघी, जिम रैमर, एलिज़ाबेथ हेस्किन और ओह सून-ह्वा शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त ज्ञान म्यूज़ियम में आयोजित मैक्रमे मिनी लैंप क्राफ्ट वर्कशाला में प्रतिभागियों ने पारंपरिक हस्तकला तकनीकों के माध्यम से उपयोगी कलाकृतियों का निर्माण किया।





