सिटी पैलेस में पीडीकेएफ आर्टिज़ंस कलेक्टिव के दूसरे दिन कला, संस्कृति और शिल्प का उत्सव

 




जयपुर, 24 जनवरी।

सिटी पैलेस, जयपुर में प्रिंसेस दिया कुमारी फाउंडेशन (पीडीकेएफ) द्वारा आयोजित पीडीकेएफ आर्टिज़ंस कलेक्टिव के दूसरे दिन बड़ी संख्या में पर्यटक, कला प्रेमी और हस्तशिल्प के शौकीन लोग पहुंचे। कार्यक्रम का अवलोकन करने उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी भी सिटी पैलेस पहुंचीं और उन्होंने महिला कारीगरों से संवाद कर उनके शिल्प, मेहनत और उद्यमशीलता की सराहना की।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पीडीकेएफ द्वारा किया गया यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि यह कलेक्टिव देशभर की महिला कारीगरों को अपनी प्रतिभा, हस्तकला और उद्यमिता को प्रस्तुत करने का एक सशक्त और प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है। दिया कुमारी ने कहा कि जनवरी माह राजस्थान में पर्यटन का पीक सीजन होता है और सप्ताहांत पर इस प्रकार के आयोजन से बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आकर्षित होते हैं। इससे न केवल आयोजन में सहभागिता बढ़ती है, बल्कि महिला कारीगरों और उनके उत्पादों को भी व्यापक पहचान मिलती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे आयोजन महिला सशक्तिकरण को मजबूती देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध शिल्प परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होंगे।

गौरतलब है कि पीडीकेएफ आर्टिज़ंस कलेक्टिव के दूसरे संस्करण में देश के 20 से अधिक राज्यों से 70 से अधिक महिला कारीगर और उद्यमी भाग ले रहे हैं। यहां कारीगरों को अपने शिल्प उत्पादों को प्रदर्शित करने, ग्राहकों से सीधे संवाद करने और अपना स्वयं का बाजार विकसित करने का अवसर मिल रहा है। एग्जीबिशन में हस्तनिर्मित वस्त्र, आभूषण, घरेलू सजावटी सामान, पारंपरिक कलाकृतियां और विविध शिल्प उत्पाद लोगों का विशेष आकर्षण बने हुए हैं।

दिन के कार्यक्रम में ‘द फ्यूचर ऑफ क्राफ्ट’ विषय पर एक विचारोत्तेजक चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिज़ाइन की निदेशक डॉ. तूलिका गुप्ता और खानूम व अराइश की सह-संस्थापिका प्रियंवदा गोलच्छा के बीच संवाद हुआ। चर्चा के दौरान शिल्प क्षेत्र के बदलते स्वरूप, नई संभावनाओं, तकनीक और शिक्षा की भूमिका तथा बदलते उपभोक्ता व्यवहार पर विस्तार से विचार किया गया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक शिल्प को केवल संरक्षित करने के बजाय आधुनिक संदर्भों में पुनः परिकल्पित कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।



कार्यक्रम में सांस्कृतिक रंग भरते हुए तृप्ति पांडे की विशेष प्रस्तुति ‘ए ट्रेज़र ऑफ टेल्स बियॉन्ड क्राफ्ट’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्टोरीटेलिंग और लाइव संगीत के माध्यम से प्रस्तुत इस कार्यक्रम में कालीघाट चित्रकला, पंजाब की फुलकारी, बिहार की मधुबनी, तेलंगाना की लम्बाडी शिल्प परंपराएं और राजस्थान की भोपा-फड़ कथावाचन परंपरा से जुड़ी भावनात्मक कहानियों को मंच पर जीवंत किया गया।

इसके अलावा ‘हेरिटेज क्राफ्ट स्टाइलिंग’ विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका संचालन सुरभि शुक्ला ने किया। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को पारंपरिक शिल्प को आधुनिक शैली में प्रस्तुत करने के रचनात्मक तरीकों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में आर्टिजन मार्केट और स्टूडियो बेरो द्वारा आयोजित रचनात्मक कार्यशालाएं भी शामिल रहीं, जिनसे आगंतुक सीधे तौर पर कला की प्रक्रिया से जुड़ सके।

शाम के सत्र में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को संगीतमय बना दिया। प्रसिद्ध गायिका लीसा मिश्रा की मधुर आवाज़ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं जोया भार्गव की बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति पर लोग झूमते नजर आए। दूसरे दिन का समापन रंगारंग नाइट बाज़ार के साथ हुआ, जहां रोशनी, संगीत और शिल्प का अनूठा संगम देखने को मिला।

एग्जीबिशन में पहुंचे पर्यटक और कला प्रेमी न केवल हस्तशिल्प उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि कारीगरों से सीधे संवाद कर उनकी कारीगरी की बारीकियों और प्रत्येक रचना के पीछे छिपी सांस्कृतिक विरासत को भी समझ रहे हैं। यह कलेक्टिव शिल्पकारों और दर्शकों के बीच एक सार्थक और जीवंत संवाद का मंच बनकर उभरा है।

उल्लेखनीय है कि पीडीकेएफ आर्टिज़ंस कलेक्टिव की संकल्पना जयपुर की प्रिंसेस गौरवी कुमारी ने की है। यह कलेक्टिव एशियन एनर्जी सर्विसेज़ एवं ऑयलमैक्स द्वारा प्रेज़ेंट किया जा रहा है तथा सहज द्वारा प्रायोजित है। कार्यक्रम का समापन 25 जनवरी को कारीगरों के लिए मार्केटिंग व क्षमता निर्माण कार्यशालाओं, पैनल चर्चाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ होगा।


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