लोक कला संगम 2026: मंच पर छाया लोकरंग का उजास तीन दिवसीय उत्सव में लोक विचार, लोकदृष्टि और लोक संस्कृति का संगम

 



जयपुर।

संस्कार भारती, जयपुर प्रांत, जवाहर कला केन्द्र तथा पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान सरकार की सहभागिता में राजस्थान के लोक रंगों का सबसे बड़ा उत्सव ‘लोक कला संगम 2026: राजस्थान रै लोकरंग रो उजास’ का शुभारंभ शुक्रवार को जवाहर कला केन्द्र में हुआ। तीन दिवसीय इस आयोजन में एक ओर विचार मंथन के सत्र आयोजित किए गए, वहीं दूसरी ओर सायंकालीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को लोक रस में सराबोर कर दिया।

लोक चौपाल में विमर्श

समारोह के प्रथम दिन लोक चौपाल का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कृष्णायन सभागार में आयोजित पहले सत्र का विषय था — ‘लोक जीवन की भारतीय अवधारणा’।

मुख्य वक्ता डॉ. इन्दु शेखर तत्पुरुष, प्रो. तनुजा सिंह एवं डॉ. विवेक भटनागर रहे, जबकि संचालन डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने किया।

डॉ. तत्पुरुष ने कहा कि बीते दो शताब्दियों में जीवन चिंतन में व्यापक बदलाव आया है। ‘फोक’ शब्द के अनुवाद के साथ ‘लोक’ शब्द प्रचलन में आया, जबकि लोक का वास्तविक अर्थ लोकतंत्र और लोकप्रियता में निहित व्यापक अवधारणा है।

डॉ. विवेक भटनागर ने लोक को सूक्ष्म से स्थूल, अवचेतना से चेतना तथा जीवन से मरण तक की यात्रा का द्योतक बताया। उन्होंने कहा कि लोकस्वरूप में प्रचलित मान्यताएं ही लोक इतिहास का निर्माण करती हैं।

प्रो. तनुजा सिंह ने लोक चेतना और चित्रकला के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोक की सरलता और सहजता चित्रकला में स्पष्ट रूप से अभिव्यक्त होती है।


द्वितीय सत्र ‘लोक दृष्टि: विचार, व्यवस्था और जीवन व्यवहार’ विषय पर आयोजित हुआ। इसमें श्री नारायण सिंह राठौड़, डॉ. गीता तोमर एवं श्री तनेराज सिंह सोढ़ा ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ. कपिल शर्मा ने किया।

डॉ. गीता तोमर ने लोकगीतों और लोक संस्कृति को निरंतर प्रवाहित प्रक्रिया बताते हुए कहा कि पारंपरिक अवसरों पर लोकगीतों में सहज भावनात्मक अभिव्यक्ति दिखाई देती है। तनेराज सिंह सोढ़ा ने कहा कि लोकदृष्टि हमें समग्र सोच प्रदान करती है, जबकि नई पीढ़ी का प्रकृति से दूर होना चिंताजनक है।

सायंकालीन संध्या का प्रारंभ संस्कार भारती के ध्येय गीत से हुआ। जयपुर प्रांत अध्यक्ष प्रो. मधु भट्ट तैलंग ने स्वागत भाषण दिया तथा महामंत्री बनवारी लाल चेजारा ने आयोजन की प्रस्तावना रखी।

रंगारंग प्रस्तुतियों ने मोहा मन

शाम को शिल्पग्राम मंच पर राजस्थान के विभिन्न अंचलों की दस लोक विधाओं की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। बृज वंदना से आरंभ हुई सांस्कृतिक यात्रा में भजनों के माध्यम से गौ माता की महिमा का बखान किया गया।

लांगुरिया, बम रसिया, जिकड़ी भजन, मयूर नृत्य, भपंग वादन, फूलों की होली और चरकुला नृत्य जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शक झूम उठे और लोक संस्कृति की जीवंत छटा का आनंद लिया।

शनिवार को होंगे विशेष कार्यक्रम

आयोजन के दूसरे दिन शनिवार को प्रातः 11 बजे लोक चौपाल में ‘राजस्थानी लोक: मन, मिट्टी और परंपरा का देशज संसार’ विषय पर पद्मश्री तिलक गिताई, अरुण प्रकाश व्यास एवं अंशु हर्ष अपने विचार रखेंगे।

वहीं ‘पर्यटन, पर्यावरण और लोक कला: धरोहर से नवाचार तक’ विषय पर डॉ. अमिता राज गोयल, अशोक वर्मा एवं वी.पी. वर्मा चर्चा करेंगे।

सायं 6 बजे से शिल्पग्राम में जयपुर गालीबाजी, चार बेंच, कठपुतली, अलगोजा वादन, चरी नृत्य, कुचामणी ख्याल एवं तमाशा जैसी लोक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी।

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