जयपुर, 15 फरवरी।
डिजिटल ट्विन मॉडलिंग और रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से खनन कार्यों को अधिक सुरक्षित, दक्ष और पारदर्शी बनाने पर विशेषज्ञों ने जोर दिया। अवसर था जयपुर के Hotel Clarks Amer में आयोजित तीन दिवसीय इंटरनेशनल माइनिंग सेमिनार के समापन सत्र का, जिसमें राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत के संकल्प ‘विजन-2047’ की प्राप्ति में खनन क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार खनन पद्धतियों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के साथ संतुलित विकास और पारिस्थितिकी संरक्षण को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।
दो महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित
सेमिनार के अंतिम दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र की अध्यक्षता डॉ. पुखराज नैनीवाल ने की, जबकि दूसरे सत्र की अध्यक्षता डॉ. पी.सी. बकलीवाल ने की। दोनों सत्रों में खनन क्षेत्र से जुड़े समसामयिक, रणनीतिक और तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत विचार-विमर्श किया।
अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने गौ-आधारित जैविक कृषि, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए राजस्थान को “पूर्ण जैविक प्रदेश” बनाने के लिए राज्य सरकार से ठोस नीतिगत पहल और “राजस्थान जैविक प्रदेश मिशन” लागू करने का आग्रह किया।
खदान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर
सत्रों में भूमिगत खनन में विकास कार्यों के अनुकूलन, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और लागत नियंत्रण की आधुनिक पद्धतियों पर विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए। बेंच स्थिरता, ढाल प्रबंधन और जोखिम मूल्यांकन जैसे तकनीकी विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि खदान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए बिना सतत खनन संभव नहीं है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भू-रासायनिक अध्ययन और आधुनिक तकनीकी उपकरणों के समुचित उपयोग से ही दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और कार्यस्थल को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
सामरिक खनिज और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर मंथन
संगोष्ठी में सामरिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, उनकी उत्पत्ति, वितरण तथा ऊर्जा संक्रमण में उनकी भूमिका पर गंभीर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, आधुनिक उद्योगों की बढ़ती मांग और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने के लिए वैज्ञानिक अन्वेषण और नई खोज रणनीतियां अत्यंत आवश्यक हैं।
खनन सुरक्षा में भूविज्ञान की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया गया कि तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान के बिना सुरक्षित व उत्तरदायी खनन की कल्पना अधूरी है।
समन्वित विकास से ही बनेगा उत्तरदायी खनन
समापन सत्र में डॉ. मनोज कुमार गौड़ ने तीनों दिनों की चर्चाओं का संश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह आयोजन खनन क्षेत्र के तकनीकी, नीतिगत और पर्यावरणीय रूपांतरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। डिजिटल नवाचार, पारदर्शी शासन और संतुलित विकास के समन्वय से ही भविष्य का खनन अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और उत्तरदायी बन सकेगा।
एम.ई.ए.आई. जयपुर चैप्टर के चेयरमैन ललित मोहन सोनी ने कहा कि भारत की खनिज संपदा देश की आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार बन सकती है, बशर्ते इसे आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और प्रभावी नीति-समर्थन से जोड़ा जाए। उन्होंने उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल देते हुए युवाओं को खनन एवं भूविज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।



