आधुनिक तकनीकों के समावेशन से खनन कार्य बन रहे अधिक सुरक्षित व पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय माइनिंग सेमिनार के दूसरे दिन 4 तकनीकी सत्रों में मंथन

 


जयपुर, 14 फरवरी।

भारत का खनन क्षेत्र पारंपरिक कार्यप्रणालियों से आगे बढ़ते हुए डिजिटल तकनीक, रणनीतिक अन्वेषण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सुदृढ़ नीतिगत समन्वय की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। यह विचार जयपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय माइनिंग सेमिनार के दूसरे दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने व्यक्त किए।

सेमिनार के दूसरे दिन चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनकी अध्यक्षता खनन क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रो. सुशील भंडारी, डॉ. एम.के. पंडित, धनंजय रेड्डी एवं डॉ. सुनील वशिष्ठ ने की। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मनोज कुमार गौड़ ने सभी सत्रों का समेकित विवरण प्रस्तुत करते हुए प्रमुख निष्कर्षों और सिफारिशों का सार रखा।

सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, नॉर्थ अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका सहित कई देशों से खनन विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि एवं शिक्षाविद शामिल हुए।

आधुनिक तकनीक से सुरक्षा और पारदर्शिता में वृद्धि

विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन, रिमोट सेंसिंग, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के समावेशन से खनन कार्य अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उत्पादक बन रहे हैं।

जयपुर चैप्टर के अध्यक्ष ललित मोहन सोनी ने बताया कि विचार-विमर्श के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि विकास अब केवल औपचारिक अनुपालन तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसे खनन संचालन का मूल सिद्धांत बनाया जाना आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी, सुरक्षित खनन पद्धतियां और संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य और दीर्घकालिक सतत विकास की आधारशिला हैं।

‘विजन-2047’ में खनन क्षेत्र की निर्णायक भूमिका

‘विजन-2047’ के संदर्भ में वक्ताओं ने खनन क्षेत्र को राष्ट्र की आर्थिक प्रगति, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और तकनीकी विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों से भारत का खनन क्षेत्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, सुरक्षित और पर्यावरण-सम्मत स्वरूप की ओर अग्रसर है।

तकनीकी सत्रों से यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि तकनीकी नवाचार, सतत विकास और दूरदर्शी नीति-निर्माण के संतुलित सामंजस्य से ही भारत का खनन क्षेत्र वर्ष 2047 तक सशक्त, आत्मनिर्भर और विश्वस्तरीय पहचान स्थापित कर सकेगा।

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