जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय का 22वां दीक्षांत समारोह संपन्न, 52 हजार से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियां



जोधपुर 

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय का 22वां दीक्षांत समारोह गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि “दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के नए चरण की शुरुआत है। ज्ञान को कर्म में बदलना ही इसका सच्चा संदेश है।”

राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान परंपरा, बेटियों की उपलब्धियों और एआई युग में विवेकपूर्ण शिक्षा पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस समाज में बेटियां आगे बढ़ती हैं, वही समाज तेजी से विकास करता है। इस अवसर पर स्वर्ण पदकों में बड़ी संख्या में बेटियों के अग्रणी रहने पर उन्होंने गर्व व्यक्त किया।



राज्यपाल ने कहा कि वेद, उपनिषद और गुरुकुल परंपरा ने केवल विद्या ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का संदेश दिया है। विश्वविद्यालयों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय करना चाहिए, ताकि विद्यार्थी कुशल पेशेवर के साथ जिम्मेदार नागरिक भी बनें।



एआई के दौर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपयोगी है, लेकिन यह मानव मस्तिष्क का स्थान नहीं ले सकती। इसे संदर्भ के रूप में अपनाएं, पर अपनी बौद्धिक क्षमता का विकास स्वयं करें। उन्होंने “राष्ट्र प्रथम” की सोच के साथ “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया।

समारोह में कुल 52,682 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 59 स्वर्ण पदक वितरित किए गए।

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