पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रकृति की पूजा आवश्यक” – श्रीजी महाराज

 


जयपुर। सांगानेर क्षेत्र के जगन्नाथपुरा में 8 फरवरी से आयोजित भागवत रस वर्षण के अंतर्गत आज पांचवें दिवस कथा के दौरान गिरिराज धरण का पूजन अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।

इस अवसर पर अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर श्री श्याम शरण देवाचार्य श्रीजी महाराज ने प्रभु श्री गिरिराज जी का पूजन कर श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का रसपान कराया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि “पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रकृति को भगवान मानकर उसका पूजन करना आवश्यक है।”

श्रीजी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को संकल्प दिलाया कि वे प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूक रहेंगे और पर्यावरण संरक्षण को अपना कर्तव्य मानेंगे। उन्होंने गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी प्रजा को यह संदेश दिया कि प्रकृति हमारी रक्षक है। जब इंद्र देव के कोप से अतिवृष्टि हुई, तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की।

निम्बार्क परिकर सर्वेश्वर शर्मा ने श्रीजी महाराज के विचार साझा करते हुए कहा कि आज मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का अंधाधुंध दोहन कर रहा है, जिससे जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ओजोन परत में क्षरण, अनियंत्रित बर्फबारी, अतिवृष्टि और अचानक बाढ़ जैसी आपदाएं मानव जीवन को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में प्रकृति संरक्षण का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है।



उन्होंने बताया कि आज भी करोड़ों श्रद्धालु प्रतिमाह गिरिराज जी की परिक्रमा कर आस्था व्यक्त करते हैं और जो अब तक नहीं जा सके हैं, उन्हें भी जीवन में एक बार अवश्य परिक्रमा करनी चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट जनों ने श्रीजी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रीजी महाराज के निजी परिकर ओम प्रकाश शर्मा ने कथा में पधारे अतिथियों का भव्य स्वागत करवाया तथा दिव्य आरती एवं भोग की व्यवस्था संपन्न करवाई।



कल कथा में महारास एवं रुक्मिणी मंगल का दिव्य आयोजन भव्य रूप से किया जाएगा।

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