आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने पंचकल्याणक हेतु नव-निर्मित 24 प्रतिमाओं का किया परीक्षण

 


वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाचार्य आचार्य वर्धमान सागर 32 पिच्छीका सहित दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में विराजमान हैं। आचार्यश्री ने 18 से 22 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रतिष्ठित की जाने वाली खड्गासन चौबीसी की 24 नव-निर्मित प्रतिमाओं का संघ सहित निरीक्षण किया।

इस अवसर पर पदमपुरा मंदिर कमेटी के मानद मंत्री हेमंत सोगानी, कोषाध्यक्ष राजकुमार कोठ्यारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। आचार्यश्री ने आवश्यक मार्गदर्शन देते हुए शेष कार्य शीघ्र पूर्ण करने की प्रेरणा प्रदान की।



प्रथम बार 108 अष्ट द्रव्यों से भगवान पद्मप्रभ की विशेष पूजा

मीडिया प्रभारी विनोद जैन कोटखावदा एवं राजेश पंचोलिया ने बताया कि इससे पूर्व आचार्य वर्धमान सागर, आचार्य प्रज्ञा सागर तथा गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के सान्निध्य में मूलनायक भगवान पद्मप्रभ की विशेष अष्टद्रव्य पूजा संपन्न हुई।

इस विशेष पूजन में जल, चंदन, अक्षत, विविध पुष्प, मोदक, नैवेद्य, दीप, धूप, फल, सूखे मेवे, अनाज सहित 108 से अधिक अष्टद्रव्यों द्वारा भगवान के गुणों की आराधना की गई। विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों, ब्रह्मचारी-ब्रह्मचारिणियों एवं श्रावक-श्राविकाओं ने अष्टद्रव्य समर्पित कर धर्मलाभ प्राप्त किया।

पूजन के अर्घ्यों का मंत्रोच्चार आचार्य वर्धमान सागर, आचार्य प्रज्ञा सागर, मुनि हितेंद्र सागर एवं अन्य संतों द्वारा किया गया। सैकड़ों भक्तों ने सहभागिता कर विशेष पूजा का लाभ लिया।

देव-शास्त्र-गुरु सान्निध्य में पूजन से कर्मक्षय

प्रचार-प्रसार संयोजक सुरेश सबलावत के अनुसार, आचार्य वर्धमान सागर महाराज ने अपने उपदेश में कहा कि देव, शास्त्र और गुरु के सान्निध्य में सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र एवं कल्याणक भूमियों में की गई पूजा से कर्मों का क्षय होता है और असीम पुण्य की प्राप्ति होती है।

गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी का मंगल प्रवेश

गणिनी आर्यिका 105 सरस्वती माताजी ससंघ का पदमपुरा क्षेत्र में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मंदिर दर्शन के उपरांत माताजी ने आचार्य वर्धमान सागर महाराज एवं अन्य संतों की वंदना की।

आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज का मंगल विहार

आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ससंघ का दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा में अल्प प्रवास के पश्चात चाकसू की ओर मंगल विहार हो गया।

आचार्य वर्धमान सागर महाराज के आशीर्वाद से प्रतिदिन पुण्यशाली भक्तों को पंचकल्याणक महोत्सव में पात्र बनने की स्वीकृति प्रदान की जा रही है।

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