मुख्यमंत्री की मानवीय पहल ‘रामाश्रय वार्ड’ बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य और सम्मान की सौगात अब तक करीब 32 लाख वृद्धजन हुए लाभान्वित

 

जयपुर, 3 फरवरी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील पहल रामाश्रय वार्ड आज प्रदेश के बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत आधार बन चुकी है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य के सभी जिला अस्पतालों में शुरू किए गए रामाश्रय वार्ड (जीरियाट्रिक वार्ड एवं जीरियाट्रिक क्लिनिक) वृद्धजनों को समर्पित स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्त मॉडल बनकर उभरे हैं। अब तक प्रदेशभर में लगभग 32 लाख बुजुर्ग इस मानवीय नवाचार से लाभान्वित हो चुके हैं।

रामाश्रय वार्डों के माध्यम से बुजुर्गों को न केवल बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं, बल्कि उन्हें अस्पतालों की जटिल प्रक्रियाओं और बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी से भी राहत मिली है। बैड पर ही जांच, सैम्पल संग्रह और रिपोर्ट उपलब्ध होने से वृद्धजनों को उपचार के दौरान सुविधा, विश्वास और मानसिक सुकून मिला है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में 14 मार्च 2024 से प्रदेश के जिला अस्पतालों में इन वार्डों का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों को सुगम, समर्पित और सम्मानपूर्वक उपचार उपलब्ध कराना है।




चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ के अनुसार, अब तक लगभग 32 लाख बुजुर्गों ने रामाश्रय वार्डों में पंजीकरण करवाया है। इनमें से करीब 30 लाख वृद्धजनों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ लिया, जबकि लगभग 2 लाख बुजुर्गों को आईपीडी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। इन वार्डों के माध्यम से करीब 18 लाख लैब जांचें की गई हैं। इसके अतिरिक्त 44 हजार से अधिक रोगियों को फिजियोथैरेपी सेवाएं प्रदान की गई हैं, वहीं 8 हजार से अधिक वृद्धजनों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए रैफर किया गया है।

रामाश्रय वार्डों को बुजुर्गों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रत्येक वार्ड में 10 फाउलर बैड आरक्षित हैं, जिनमें महिला एवं पुरुष रोगियों के लिए समान सुविधाएं उपलब्ध हैं। बैड के बीच परदे, आपात स्थिति के लिए नर्सिंग अलार्म सिस्टम तथा महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालयों में ग्रेब-बार जैसी सहायक व्यवस्थाएं की गई हैं।

इन वार्डों में फिजियोथैरेपी की समुचित व्यवस्था के साथ शॉर्ट वेव डायाथर्मी, अल्ट्रासाउंड थैरेपी, सर्वाइकल एवं पैल्विक ट्रेक्शन तथा ट्रांस इलेक्ट्रिक नर्व स्टिमुलेटर जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही व्हीलचेयर, ट्रॉली, मेडिसिन कैबिनेट और आवश्यक फर्नीचर की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

प्रत्येक रामाश्रय वार्ड के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो वार्ड की संपूर्ण व्यवस्थाओं का संचालन करता है। रोगियों की देखभाल के लिए अलग से नर्सिंग स्टाफ और साफ-सफाई के लिए कार्मिक तैनात किए गए हैं। आईपीडी में भर्ती वृद्धजनों को विशेषज्ञ सेवाएं वार्ड में ही उपलब्ध कराई जा रही हैं। जांच के लिए सैम्पल वार्ड से ही एकत्र किए जाते हैं और रिपोर्ट भी बैड पर ही उपलब्ध करवाई जाती है।

इसके अलावा, राजकीय जिला एवं उप जिला अस्पतालों में वृद्धजनों के लिए विशेष जीरियाट्रिक क्लिनिक की व्यवस्था की गई है। रजिस्ट्रेशन, जांच और दवा वितरण केंद्रों पर बुजुर्गों के लिए अलग सुविधा सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें लंबी कतारों में खड़ा न रहना पड़े और सहज रूप से उपचार मिल सके।

रामाश्रय वार्ड आज केवल एक स्वास्थ्य पहल नहीं, बल्कि बुजुर्गों के प्रति सरकार की संवेदनशील सोच और सामाजिक दायित्व का जीवंत उदाहरण बन चुके हैं। यह पहल साबित करती है कि जब नीति में करुणा और व्यवस्था में समर्पण जुड़ता है, तो समाज के वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं।

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