जयपुर, 7 फ़रवरी 2026:
मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) के सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन (सीडीओई) द्वारा ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रमों के लिए पाँचवाँ दीक्षांत समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। यह समारोह डिजिटल शिक्षा, अकादमिक उत्कृष्टता और समावेशी उच्च शिक्षा की दिशा में एमयूजे की सतत प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण रहा।
समारोह में राजस्थान के माननीय राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एमबीए, बीबीए, एमसीए, बीसीए, एमएजेएमसी, बी.कॉम और एम.कॉम कार्यक्रमों के कुल 9,043 विद्यार्थी डिग्री प्राप्त करने के पात्र रहे। इनमें से 1,531 विद्यार्थियों को मंच पर डिग्रियाँ प्रदान की गईं, जबकि शेष स्नातकों को अनुपस्थित रूप से डिग्री प्रदान की गई। विशिष्ट अतिथि के रूप में अम्बरीश सिन्हा, संस्थापक एवं सीईओ, यूनेक्स्ट लर्निंग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक शैक्षणिक शोभायात्रा से हुई, जिसका नेतृत्व मुख्य अतिथि एवं विश्वविद्यालय के वरिष्ठ नेतृत्व ने किया। इस अवसर पर एमयूजे के कुलपति डॉ. नीति निपुण शर्मा, प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. करुणाकर ए. कोटेगर, कुलसचिव डॉ. अमित सोनी, प्रोवोस्ट डॉ. नीतू भटनागर, सीडीओई निदेशक डॉ. मल्लिकार्जुन गडप्पा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. दासरी नागराजू सहित अकादमिक परिषद के सदस्य उपस्थित रहे। राष्ट्रगान एवं मणिपाल कुलगीत के पश्चात मुख्य अतिथि को पौधा भेंट किया गया, जो सतत विकास का प्रतीक है।
स्वागत संबोधन में डॉ. करुणाकर ए. कोटेगर ने मणिपाल समूह के संस्थापक डॉ. टी. एम. ए. पई के दूरदर्शी शैक्षिक दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा किसी सीमा या माध्यम तक सीमित नहीं होती। उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य में सफलता के लिए सहनशीलता, साहस और दृढ़ संकल्प को आवश्यक बताया।
कुलपति डॉ. नीति निपुण शर्मा ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति, अनुसंधान, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग, अकादमिक उपलब्धियों एवं खेलों में प्राप्त सफलताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रम विद्यार्थियों को उन्नत ज्ञान और कौशल प्रदान कर उन्हें प्रतिस्पर्धी वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करते हैं।
मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने अपने संबोधन में भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-शिष्य के घनिष्ठ संबंधों पर आधारित यह प्रणाली समग्र विकास, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का आधार रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी दर्शन को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करती है।
राज्यपाल ने मातृभाषा, हिंदी और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे समझ, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को बल मिलता है। उन्होंने डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा को देश के हर कोने तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बताया और विश्वास व्यक्त किया कि पारंपरिक मूल्यों, एनईपी 2020 और आधुनिक तकनीक के समन्वय से भारत वैश्विक शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव डॉ. अमित सोनी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, अभिभावकों, संकाय सदस्यों, विश्वविद्यालय प्रबंधन एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया और सभी स्नातकों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। यह दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारित किया गया।





