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जयपुर, 7 फरवरी:
“हर माह एक उपवास ही सर्व बीमारियों का इलाज है।” ये उद्गार अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने शनिवार को ईपी सेंट्रल लॉन, जयपुर में आयोजित ‘हर माह एक उपवास’ कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने कहा कि दुनिया के लगभग सभी धर्मों और संस्कृतियों में उपवास को ईश्वर से जुड़ने और आत्मसंयम प्राप्त करने का सशक्त माध्यम माना गया है। उपवास के माध्यम से व्यक्ति अपनी सबसे प्रबल इच्छा—भूख—पर विजय प्राप्त करता है, जिससे अद्भुत आत्मशक्ति (विल पावर) का संचार होता है।
उन्होंने उपवास के आध्यात्मिक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि उपवास शब्द ‘उप’ और ‘वास’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है—अपने निकट रहना, आत्मा के समीप वास करना। भोजन की चिंता से मुक्त होकर जो समय मिलता है, उसे जप, तप, ध्यान और स्वाध्याय में लगाना ही उपवास की सार्थकता है।
आचार्य श्री ने उपवास को विभिन्न रूपों में परिभाषित करते हुए कहा—
उपवास वह वैद्य है, जो तन और मन को निरोगी बनाता है।
उपवास वह सारथी है, जो इंद्रियों और मन को वश में रखता है।
उपवास वह सेतु है, जो आत्मा और परमात्मा के बीच की दूरी मिटाता है।
उपवास वह हंसा है, जो आत्मा और शरीर के भेद को स्पष्ट करता है।
उपवास वह पैनी छैनी है, जो कर्मों को काटकर आत्मा को परमात्मा बनने की ओर ले जाती है।
उन्होंने कहा कि उपवास केवल पेट खाली रखने का नाम नहीं, बल्कि कुविचारों से दूर रहकर सात्विक जीवन जीने का संकल्प है। यदि उपवास के दौरान मन में क्रोध या ईर्ष्या बनी रहे, तो वह केवल लंघन है, उपवास नहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे ने की, जबकि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा एवं कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विशिष्ट अतिथि रहे। दीप प्रज्ज्वलन उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा एवं हूमड़ परिवार द्वारा किया गया
इस अवसर पर आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने जयपुर प्रवास समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय भगवत जिनेन्द्र महाअर्चना महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान की सफलता हेतु अध्यक्ष सुभाषचंद जैन, महामंत्री विनोद जैन (कोटखावदा) एवं कोषाध्यक्ष कैलाशचंद छाबड़ा सहित अन्य पदाधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा हर माह एक उपवास टीम को आशीर्वाद दिया।
अंतर्मना धार्मिक एवं पारमार्थिक न्यास तथा पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में द्वितीय सामूहिक उपवास एवं प्रासंगिक कवि सम्मेलन का भी आयोजन हुआ। राष्ट्रीय कवि कविता तिवारी, विनीत चौहान, मनवीर मधुर, राव अजातशत्रु, तरुण जैन सहित कई कवियों ने देशभक्ति और आत्मसंयम से ओत-प्रोत रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
यह आयोजन अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज एवं योगऋषि बाबा रामदेव की प्रेरणा से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन बा. ब्र. तरुण भैया ने किया तथा समापन जिनवाणी स्तुति के साथ हुआ।
‘हर माह एक उपवास’ अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, साधना और स्वस्थ जीवन की ओर बढ़ता एक आध्यात्मिक जन-आंदोलन बन चुका है, जिसने जयपुर से नई दिशा प्राप्त की है।