सनातन संस्कृति की आधार भाषा है संस्कृत — स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज संस्कृत के संरक्षण एवं विकास के लिए राज्य सरकार गंभीर

 


जयपुर।

जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय का 26वां स्थापना दिवस शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हवामहल विधायक एवं विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् के सदस्य स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति की आधारशिला संस्कृत भाषा है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की जीवन-दृष्टि, ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का मूल स्रोत है।

उन्होंने कहा कि संस्कृत का संरक्षण और संवर्धन कर इसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज ने त्रिवेणी महाराज के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि वैदिक परंपरा, प्राचीन नक्षत्र व्यवस्था, अश्वमेघ यज्ञ परंपरा तथा प्राचीन ग्रंथों और अभिलेखों का संरक्षण एवं प्रचार वर्तमान समय की महती आवश्यकता है।




उन्होंने कहा कि रामचरितमानस और श्रीमद्भगवद्गीता जैसे ग्रंथों का अध्ययन समाज को संस्कारवान, नैतिक और राष्ट्रनिष्ठ बनाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्कृत से जुड़े प्रश्न, भारतीय पंचांग की जानकारी, वाणी की शुद्धता तथा संस्कृति आधारित शिक्षा ‘अमृत काल’ में भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने की दिशा में सशक्त कदम सिद्ध होगी।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक हैं। आवश्यकता है कि संस्कृत को शोध, तकनीक और आधुनिक विषयों से जोड़ते हुए वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित किया जाए, जिससे इसकी सार्वकालिक उपयोगिता सिद्ध हो सके।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मदनमोहन झा ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शास्त्रों का अध्ययन नहीं, बल्कि संस्कृत ज्ञान को समकालीन संदर्भों से जोड़कर समाजोपयोगी बनाना है। संस्कृत शिक्षा के माध्यम से नैतिकता, अनुशासन और समन्वय की भावना विकसित होती है, जो राष्ट्र निर्माण में सहायक है।

समारोह में रघुनाथ मंदिर आबू के सियारामदास महाराज, वेदांती हरिशंकरदास, टीला गद्दी आचार्य हरिदासदेवाचार्य, हरिहर मठ के नंदकिशोरदास महाराज सहित अनेक संतों ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के अंतर्गत वेद विभागाध्यक्ष डॉ. नारायण होसमने के आचार्यत्व में शांति यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शास्त्री कोसलेंद्रदास ने किया।

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