जवाहर कला केन्द्र में ‘लोक कला संगम’ का रंगारंग दूसरा दिन.लोक जीवन, परंपरा और संस्कृति पर गंभीर मंथन के साथ मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

 

जयपुर। संस्कार भारती, जवाहर कला केन्द्र और पर्यटन, कला संस्कृति विभाग राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘लोक कला संगम’ महोत्सव के दूसरे दिन लोक जीवन, परंपरा और संस्कृति पर गंभीर मंथन के साथ मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

‘राजस्थान की लोक कला अत्यंत समृद्ध’

कृष्णायन सभागार में ‘राजस्थानी लोक: मन, मिट्टी और परम्परा का देशज संसार’ विषय पर संवाद आयोजित हुआ। प्रान्त अध्यक्ष प्रो. मधु भट्ट तैलंग ने आभार व्यक्त किया, जबकि महामंत्री बनवारी लाल चेजारा ने प्रस्तावना रखी




पद्मश्री तिलक गिताई ने कहा कि राजस्थान की लोक परंपरा बेहद समृद्ध है और स्थानीय भाषाओं में रागमाला जैसे विषयों पर हुआ कार्य विदेशों में भी शोध का आधार बना। अरुण प्रकाश व्यास ने लोक समझ विकसित करने के लिए सोशल मीडिया जैसी नई तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया। अंशु हर्ष ने राजस्थानी साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। सत्र का संचालन डॉ. चेतन औदिच्य ने किया।



‘संकल्प नहीं, व्यवहार में अपनाएं लोक जीवन’

द्वितीय सत्र ‘पर्यटन, पर्यावरण और लोक कला: धरोहर से नवाचार तक’ विषय पर केंद्रित रहा। अशोक शर्मा ने कहा कि हमारे शास्त्रों में पर्यावरण संरक्षण का संदेश सदियों पहले दिया गया है, कई पौधों के धार्मिक महत्व के पीछे वैज्ञानिक आधार है। उन्होंने नई पीढ़ी को लोक परंपराओं का वैज्ञानिक महत्व समझाने की आवश्यकता बताई।

अरुण शर्मा ने लोक में प्रचलित नियमों के स्वविवेक से पालन और परिवार के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त की। डॉ. अमिता राज गोयल ने कहा कि सच्चा नवाचार वही है जो लोक को बदले नहीं, बल्कि उसे वर्तमान संदर्भ में सशक्त रूप से स्थापित करे।

शिल्पग्राम में सजी लोक रंगत

शाम को शिल्पग्राम के मंच पर लोक कलाकारों ने समां बांध दिया। कैलाश गोड़ की ‘जयपुर की गालीबाजी’, टोंक के मोहम्मद आसिफ खान की ‘चार बेंत’ प्रस्तुति, राजेश भाट की कठपुतली कला और गोपीमाली एंड बिंदोरी ग्रुप के अलगोजा वादन ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

राजेन्द्र राव व समूह ने चरी और चिरमी नृत्य प्रस्तुत किया, जबकि सत्यनारायण शर्मा व पार्टी ने कुचामणी ख्याल से लोक रंग बिखेरा। वासुदेव भट्ट ने तमाशा लोक कला की रोचक प्रस्तुति दी।

कल ये होंगे प्रमुख आयोजन

रविवार सुबह 11:30 बजे ‘लोक देवता और सामाजिक समरसता’ विषय पर राजवीर चलकोई, डॉ. ज्योति भारती गोस्वामी और रामू रामदेव अपने विचार रखेंगे।

दोपहर 2:30 बजे ‘लोक का अन्त: ब्राह्य सांस्कृतिक स्वरूप: पारिवारिक मूल्यों का आधार’ विषय पर पं. आलोक भट्ट, प्रो. मदन सिंह राठौड़ और डॉ. शिवदान सिंह जोलावास संवाद करेंगे।

शाम 6 बजे से शिल्पग्राम में लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित होंगी।

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