जोधपुर, 02 फरवरी।
राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (रिफ) 2026 के तीसरे दिन सोमवार को प्रतिष्ठित फिल्म निदेशक एवं लेखिका सीमा कपूर की आत्मकथा “यूँ गुजरी अब तक” पर विशेष संवाद एवं पुस्तक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रोग्राम होस्ट अंशु हर्ष ने किया।
इस अवसर पर सीमा कपूर ने बेहद सहज, स्पष्ट और बेबाक अंदाज में अपने जीवन के संघर्ष, रचनात्मक यात्रा और आत्मखोज से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक किसी एक क्षण का परिणाम नहीं, बल्कि जीवन के लंबे संघर्षों और अनुभवों का निचोड़ है। शुरुआती दौर में उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से पुस्तक में उकेरा है।
आध्यात्मिक यात्रा पर चर्चा करते हुए सीमा कपूर ने कहा कि आत्मखोज एक सतत प्रक्रिया है, जो जीवन भर चलती रहती है। उन्होंने कहा कि सच्चाई के साथ अपनी कहानी लिखना उनके लिए आत्मसम्मान का विषय रहा है।
अपने माता-पिता और रंगमंच से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता की थियेटर कंपनी राजस्थान के गांव-गांव में प्रस्तुतियां देती थी। वर्ष 1969 के बाद सिनेमा के बढ़ते प्रभाव से रंगमंच का दौर कमजोर पड़ने लगा, जिसके बाद उनके पिता भवानीमंडी (राजस्थान) में बस गए।
अभिनेता ओम पुरी के साथ अपने संबंधों पर बोलते हुए सीमा कपूर ने 1979 से 2017 तक की साझा यात्रा को अनुभवों से भरपूर और सीख देने वाली बताया। उन्होंने अपने भाई एवं प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक रणजीत कपूर का भी उल्लेख किया।
महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखते हुए सीमा कपूर ने कहा कि महिलाओं को हर स्तर पर अपनी क्षमता साबित करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक और वैचारिक स्वतंत्रता महिलाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उनके अनुसार, स्वतंत्रता समाज को सशक्त बनाती है, जबकि स्वच्छंदता समाज को कमजोर करती है।
कार्यक्रम के अंत में सीमा कपूर ने दर्शकों के प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया। यह संवाद सत्र विचारोत्तेजक, प्रेरणादायक और आत्ममंथन से भरपूर रहा।
