आधुनिकता की दौड़ में लोक भाषा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान संकट में – पुनिया राजस्थानी भाषा और सिनेमा के भविष्य पर हुआ मंथन RIFF मंच बना सांस्कृतिक संवाद का केंद्र

 


जोधपुर, 02 फरवरी।

राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) 2026 के तहत सोमवार को मिराज सिनेमा, ब्लू सिटी मॉल में ओपन फोरम का आयोजन किया गया। फेस्टिवल के तीसरे दिन “सिनेमा: क्षेत्रीय भाषाएं और राजस्थानी भाषा की पहचान, भविष्य और चुनौतियां” विषय पर विशेष टॉक शो हुआ, जिसमें फिल्म, ओटीटी और कंटेंट जगत से जुड़े दिग्गजों ने भाग लिया।

टॉक शो में भाजपा हरियाणा प्रभारी एवं पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया ने क्षेत्रीय भाषाओं, विशेषकर राजस्थानी भाषा के संरक्षण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमारी लोक भाषा, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान संकट में हैं। ऐसे में RIFF जैसे आयोजन लोक संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।

उन्होंने RIFF के 12वें संस्करण की सफलता पर आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि यह मंच आने वाले समय में फिल्म, लेखन और ओटीटी के जरिए लोक भाषाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। पुनिया ने कहा कि कला और संस्कृति केवल मुनाफे का साधन नहीं, बल्कि समाज की आत्मा होती हैं, और ऐसे प्रयास भविष्य की पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।



राजस्थानी सिनेमा को डिजिटल मंच से नई उम्मीद

स्टेज OTT राजस्थान की कंटेंट हेड रेनू राणा ने कहा कि जोधपुर में पले-बढ़े होने के कारण उनका राजस्थानी सिनेमा से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री देश की अग्रणी रीजनल इंडस्ट्री में शामिल थी। स्टेज OTT के माध्यम से अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ने और उस सपने को साकार करने का अवसर मिला है।

उन्होंने बताया कि स्टेज OTT फीचर फिल्म, वेब सीरीज और लॉन्ग सीरीज के जरिए नए कलाकारों और थिएटर आर्टिस्ट्स को मंच दे रहा है, जिससे राजस्थानी सिनेमा के पुनरुत्थान की उम्मीद मजबूत हुई है।

संघर्ष, दर्शक और कंटेंट की गुणवत्ता पर जोर

लेखक व निर्देशक पंकज तंवर ने कहा कि सिनेमा और कंटेंट की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए निरंतर संघर्ष और आत्ममंथन जरूरी है। यदि कोई फिल्म या कंटेंट दर्शकों तक नहीं पहुंच पा रहा है, तो उसकी वजह समझकर खुद को और बेहतर बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दर्शक ही किसी भी कंटेंट की असली कसौटी होते हैं, और सोशल मीडिया के दौर में पहचान पाने के लिए बेहतर कहानी, गीत और उच्च गुणवत्ता का काम जरूरी है।

लोक संगीत को नई पहचान देने का प्रयास

फिल्म निर्देशक कपिल तंवर ने बताया कि अपनी शॉर्ट फिल्म के लिए वे राजस्थान की आत्मा से जुड़ा संगीत तलाश रहे थे। इसी दौरान म्यूजिक डायरेक्टर अजय सोनी का रिकॉर्ड किया गया घूमर उन्हें बेहद पसंद आया, जिसे फिल्म में शामिल किया गया। अजय सोनी ने फिल्म का पूरा संगीत तैयार किया। कपिल तंवर ने कहा कि वे बॉलीवुड संगीत के बजाय स्थानीय लोक वाद्ययंत्रों और फोक म्यूजिक को प्राथमिकता देते हैं। यह प्रयोग जोखिम भरा था, लेकिन सफल रहा और आगे भी वे इसी दिशा में काम करेंगे।

RIFF मंच से राजस्थानी भाषा को लेकर भावुक अपील

RIFF के फाउंडर एवं फेस्टिवल डायरेक्टर सोमेंद्र हर्ष ने कहा कि भले ही प्रोफेशनल जीवन में अंग्रेज़ी जरूरी हो, लेकिन घर और समाज में मातृभाषा का अधिक से अधिक प्रयोग होना चाहिए। उन्होंने अपील की कि यदि आज हम अपनी भाषा में बात करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों तक राजस्थानी जीवित रहेगी। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद उन्होंने निसंकोच राजस्थानी में बोलने और भविष्य में अधिक राजस्थानी फिल्मों के प्रदर्शन का सपना साझा किया।

राजस्थानी म्यूजिक को मजबूत करने पर जोर

ऋषि सिंह सिसौदिया, संस्थापक ऋषि एंटरटेनमेंट टी-सीरीज ने कहा कि राजस्थानी गीतों की पहचान बनाए रखने के लिए सही म्यूजिक, विज़ुअलाइजेशन और प्रभावी प्रमोशन जरूरी है। बिना प्रचार के कोई भी गाना नहीं चलता। उन्होंने लंगा-मंगणियार और लोक कला को नए कम्पोज़िशन के साथ जोड़ने पर जोर दिया।

आज 20 से अधिक फिल्मों का नि:शुल्क प्रदर्शन

राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के तहत मंगलवार को मिराज सिनेमा, ब्लू सिटी मॉल में दर्शकों के लिए 20 से अधिक फिल्मों का नि:शुल्क विशेष प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान रघुवीरम – द बर्डसॉन्ग, टुकटुक वाली, घूमर, लॉर्ड्स सिग्नल, स्ट्रेज़, ऐ ज़िंदगी सहित कई चर्चित फिल्मों को ग्रुप स्क्रीनिंग के माध्यम से दिखाया जाएगा। यह आयोजन सिनेमा प्रेमियों को विविध भाषाओं और विषयों की फिल्मों से रूबरू कराने का बेहतरीन अवसर प्रदान करेगा।

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