जयपुर आर्ट वीक : रचनात्मक अनुभवों की बहुरंगी शाम मोजरी पेंटिंग से लेकर स्मृतियों के संवाद और आत्म-अन्वेषण पर केंद्रित रहे कार्यक्रम

 

जयपुर, 2 फ़रवरी।

जयपुर आर्ट वीक के अंतर्गत आयोजित सत्रों में परंपरा, समकालीन कला और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न सांस्कृतिक स्थलों पर आयोजित गतिविधियों ने कला प्रेमियों को रचनात्मक अनुभवों से जोड़ते हुए गहन संवाद का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रमों की शृंखला में पाटी मुख्यालय पर आयोजित ‘पेंट योर ओन मोजरी’ कार्यशाला में प्रतिभागियों को राजस्थान की पारंपरिक मोजरी कला से रूबरू कराया गया। इस सत्र में डीआईवाई किट के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी पसंद के रंग और डिज़ाइन से वेगन मोजरी तैयार की। कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक हस्तकला को नैतिक और सतत दृष्टिकोण के साथ अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा। सत्र का संचालन काइंड सोल द्वारा किया गया, जिसमें प्रतिभागी अपने हाथों से बनाई गई पहनने योग्य मोजरी को एक सांस्कृतिक स्मृति के रूप में साथ ले गए।





इसी क्रम में जवाहर कला केंद्र में आयोजित ‘अंधा युग’ थीम पर आधारित प्रदर्शनी, जिसे वरिष्ठ कलाकार अनीता दुबे ने क्यूरेट किया है, दर्शकों से मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रिया के चलते अब 15 फ़रवरी तक खुली रहेगी। इस प्रदर्शनी में देश-विदेश के 50 कलाकारों की क्यूरेटेड इंस्टॉलेशन प्रस्तुत की गई हैं, जो समकालीन कला के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय सरोकारों पर संवाद स्थापित करती हैं। यह प्रदर्शनी जयपुर आर्ट वीक के प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरकर सामने आई है।

वहीं राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ड्रॉप-इन गतिविधि ‘नवी पुरानी हथाई’ में पारंपरिक हथाई की अवधारणा को नए संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने व्यक्तिगत स्मृतियों, शहरी बदलाव और रोज़मर्रा के अनुष्ठानों से जुड़े अनुभव साझा किए, जिसके माध्यम से शहर की सामूहिक पहचान पर विचार-विमर्श किया गया। यह गतिविधि बच्चों सहित सभी आयु वर्ग के लिए खुली रही।

शाम को जवाहर कला केंद्र स्थित सुकृति गैलरी में ‘बाइलेटरल ड्रॉइंग : रिदमिक सेल्फ-पोर्ट्रैचर इन फ्लक्स’ कार्यशाला आयोजित की गई। कलाकार एवं मनोवैज्ञानिक शगुन अग्रवाल द्वारा संचालित इस सत्र में समकालीन कला अभ्यास और आर्ट थेरेपी का प्रभावशाली मेल देखने को मिला। बड़े कैनवास पर द्विपक्षीय ड्रॉइंग के ज़रिए प्रतिभागियों ने गति और लय के माध्यम से अपनी आंतरिक भावनाओं को अभिव्यक्त किया। यह प्रक्रिया प्रतिनिधित्व से अधिक अनुभव पर केंद्रित रही, जिसमें नियंत्रण और समर्पण जैसे भावों की खोज की गई।

मंगलवार, 3 फ़रवरी को जयपुर आर्ट वीक का समापन किया जाएगा, जिसमें दोपहर तक सभी आर्ट इंस्टॉलेशन दर्शकों के लिए खुले रहेंगे।

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