जयकारों के बीच आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ का पदमपुरा से मंगल विहार चाकसू के आदिश्वर धाम में हुआ भव्य मंगल प्रवेश, बुधवार को विज्ञान तीर्थ में रात्रि विश्राम




पदमपुरा, 10 फरवरी।

भगवान महावीर के बाद सर्वाधिक उपवास करने वाले तथा सम्मेद शिखर जी के स्वर्णभद्र कूट पर 557 दिनों की मौन साधना के साथ उत्कृष्ट सिंहनिष्क्रीडित व्रत साधना करने वाले साधना महोदधि अन्तर्मना आचार्य 108 प्रसन्न सागर महाराज ससंघ का मंगलवार को दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदमपुरा से चाकसू के आदिश्वर धाम के लिए मंगल विहार हुआ। इस अवसर पर जयकारों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

पदमपुरा कमेटी अध्यक्ष सुधीर जैन एवं मानद मंत्री हेमंत सोगानी ने बताया कि मंगल विहार के अवसर पर पदमपुरा में प्रवासरत आचार्य वर्धमान सागर महाराज के मुनिराज, आर्यिका माताजी, आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज एवं गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी भी साथ चलकर काफी दूर तक विदाई देने पहुंचे। चारों संघों के विदाई दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।

मंगल विहार के दौरान आचार्य संघ गुलाब कौशल्या चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित पदम ज्योति नेत्र चिकित्सालय के बाहर पहुंचा, जहां मुख्य ट्रस्टी डॉ. नरेश मेहता, राजस्थान जैन सभा जयपुर के उपाध्यक्ष विनोद जैन कोटखावदा, जगतपुरा जैन समाज अध्यक्ष कमल वैद सहित समाजजनों ने भव्य अगवानी की। इसके बाद शिवदासपुरा होते हुए आचार्य संघ चाकसू के आदिश्वर धाम पहुंचा, जहां बैंड-बाजों के साथ जुलूस के रूप में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। अध्यक्ष प्रवीण शाह के नेतृत्व में आरती कर स्वागत किया गया।

विहार यात्रा में विनोद जैन कोटखावदा, राजेश रावकां, विनय सोगानी, कमल वैद, आशीष चौधरी, अमित ठोलिया, विपुल छाबड़ा सहित बड़ी संख्या में गुरु भक्त शामिल रहे।

इससे पूर्व पदमपुरा में प्रातः चार बजे से पूजा-विधान एवं अनुष्ठान हुए। प्रातः सात बजे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मूलनायक भगवान पदमप्रभु के जयकारों के बीच अभिषेक कर विश्व शांति व समृद्धि की कामना के साथ शांतिधारा की। आयोजित धर्मसभा में मंगलाचरण, चित्र अनावरण और दीप प्रज्ज्वलन के बाद आचार्य वर्धमान सागर महाराज, आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज, आचार्य प्रसन्न सागर महाराज एवं गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी के मंगल प्रवचन हुए।

प्रवचनों में कहा गया कि श्रद्धा, समर्पण और विश्वास के साथ की गई प्रभु एवं गुरु भक्ति से वर्तमान और भविष्य दोनों सुधरते हैं तथा श्रावकों को यथाशक्ति धर्म और सेवा कार्यों में सहभागिता करनी चाहिए।

आहार चर्या के पश्चात आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने मूलनायक भगवान पदमप्रभु की वेदी के 108 परिक्रमा कर सामायिक की। इसके बाद वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाचार्य वर्धमान सागर महाराज की वंदना कर संघ चाकसू के लिए विहार हुआ।

प्रचार-प्रसार संयोजक सुरेश सबलावत एवं सह संयोजक विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि मंगलवार को चाकसू में मंगल प्रवेश के बाद गुरु पूजा हुई तथा सायंकाल गुरु भक्ति एवं आनंद यात्रा का आयोजन किया गया। रात्रि विश्राम आदिश्वर धाम चाकसू में हुआ।

बुधवार को प्रातः आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ का जयकारों के बीच विज्ञान तीर्थ गुंशी के लिए मंगल विहार होगा, जहां सायंकाल मंगल प्रवेश एवं रात्रि विश्राम रहेगा। गुरुवार, 12 फरवरी को निवाई में विशाल जुलूस के साथ भव्य मंगल प्रवेश होगा।


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