जयपुर।
‘युवा एकल’ श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित विशेष सांस्कृतिक संध्या में वरिष्ठ कथक गुरु, कलाकार एवं विदुषी डॉ. ज्योति भारती गोस्वामी की एकल कथक प्रस्तुति ने श्रोताओं को शास्त्रीय गरिमा और साधना से सराबोर कर दिया। कथक प्रेमियों, कलाकारों और विद्यार्थियों से खचाखच भरा सभागार इस सशक्त कला-अनुभव का साक्षी बना।
प्रस्तुति का शुभारंभ शिव स्तुति “रंगीला शंभू” से हुआ, जिसने मंच पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। ताल पक्ष में तीन ताल की विलंबित, मध्य एवं द्रुत लय में प्रस्तुत रचनाओं ने डॉ. गोस्वामी की लयात्मक परिपक्वता, तकनीकी नियंत्रण और सटीक चरण विन्यास को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।
अभिनय पक्ष में खंडिता नायिका की भाव-व्यंजना विशेष रूप से सराही गई। नेत्राभिनय और अंग संचालन में उनकी संवेदनशीलता और गहराई स्पष्ट दिखाई दी। प्रस्तुति की एक विशेषता यह रही कि डॉ. गोस्वामी ने कथक को केवल मंच पर प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि गुरु–शिष्य परंपरा के अंतर्गत सीखी गई साधना, अनुशासन और पारंपरिक बंदिशों को ‘खुले नाच’ की शैली में जीवंत किया।
कौशल कांत पंवार की सशक्त पढ़ंत ने कथक की लयात्मक आत्मा को और सुदृढ़ किया। संगति कलाकारों में गायन एवं हारमोनियम पर रमेश मेवाल, तबले पर आदित्य सिंह राठौर, पखावज पर युवराज सिंह राठौर तथा पढ़ंत में कौशल कांत पंवार और मोनीका धवल ने उत्कृष्ट संगति प्रदान की।
कुल मिलाकर, यह प्रस्तुति ‘युवा एकल’ श्रृंखला की साधनात्मक, विचारोत्तेजक और शास्त्रीय दृष्टि को सशक्त रूप से स्थापित करती नजर आई।

