नई दिल्ली/मुंबई, 17 फरवरी 2026। Inter Faith Harmony Foundation of India ने राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) के सहयोग से “अंतरधार्मिक परंपराएँ और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण meetingofmindsindia यूट्यूब चैनल पर किया गया, जिसमें विद्वानों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भारत की बहुलतावादी परंपरा और साझा सांस्कृतिक विरासत पर विचार रखे।
सेमिनार में प्रो. (डॉ.) दिव्या तंवर मुख्य पैनलिस्ट और गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में शामिल हुईं। वे दिल्ली स्थित दिव्य: फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं तथा शिक्षाविद्, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं। वर्ष 2013 में स्थापित फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने वंचित महिलाओं और बच्चों को शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और उद्यमिता के जरिए सशक्त बनाने की पहल की है। फाउंडेशन को ‘बेस्ट एनजीओ अवॉर्ड 2024’ सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।
वर्तमान में Somaiya Vidyavihar University, मुंबई में एडजंक्ट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. तंवर ने अपने संबोधन में कहा कि समावेशी सामाजिक सद्भावना भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि अंतरधार्मिक परंपराएँ एकता, शांति और सामूहिक प्रगति को मजबूत करती हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. अफशर आलम रहे। अध्यक्षता प्रोफेसर ख्वाजा अब्दुल मुंतक़ीम ने की। स्वागत भाषण डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद ने दिया, परिचयात्मक टिप्पणी फैनन अहमद ख्वाजा ने प्रस्तुत की तथा समापन संबोधन डॉ. मो. शम्स इकबाल, निदेशक, एनसीपीयूएल ने दिया।
सेमिनार में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की ताकत उसकी विविधता और साझा सांस्कृतिक संरचना में निहित है, जहाँ विभिन्न धर्म और परंपराएँ सह-अस्तित्व के माध्यम से सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान की विरासत को आगे बढ़ाती हैं।




