जयपुर, 3 फरवरी।
राजस्थान विश्वविद्यालय में भारत बोध कार्यक्रम के अंतर्गत एक दिवसीय विशेष कार्यक्रम का आयोजन खेल मंडल एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम में कबड्डी, रस्साकशी एवं सितोलिया सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं शासन सचिव नीरज के. पवन (आईएएस) उपस्थित रहे। उन्होंने खेल परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए कहा कि पारंपरिक खेल भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और इनसे युवाओं में स्वास्थ्य के साथ-साथ आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में पारंपरिक खेलों का संरक्षण समय की आवश्यकता है तथा इनके माध्यम से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा दिया जा सकता है। विभिन्न अतिथियों और वक्ताओं ने भारत बोध विषय पर अपने विचार साझा करते हुए पारंपरिक खेलों को सामाजिक विकास से जोड़ने पर बल दिया।
खेल मंडल की सचिव डॉ. प्रतिमा सिंह रत्नू ने अपने संबोधन में कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। परिचर्चा के पश्चात खुला संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों और अतिथियों ने खेलों के भविष्य और खेल नीति पर चर्चा की।
कार्यक्रम के समापन पर शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय की खेल प्रतिभाओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पुरुष वर्ग में सितोलिया की 8 टीम, कबड्डी की 8 टीम एवं रस्साकशी की 6 टीमों ने भाग लिया। वहीं महिला वर्ग में कबड्डी की 8 टीम, सितोलिया की 6 टीम एवं रस्साकशी की 6 टीमों की सहभागिता रही।
परिचर्चा सत्र में कुल 257 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही, जबकि खेल मैदान में 400 से अधिक विद्यार्थियों ने देशभक्ति की भावना के साथ पारंपरिक खेल गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।


