आत्मबोध से विश्वबोध तक: साहित्य परिषद में ‘भारतबोध और शत्रुबोध’ पर चर्चा

 


जयपुर, 11 फरवरी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर द्वारा आयोजित "साहित्य परिक्रमा" परिचर्चा में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय संगठन मंत्री मनोज कुमार ने आत्मबोध, विश्वबोध और भारतबोध के महत्व पर प्रकाश डाला।

मनोज कुमार ने कहा कि भारतबोध हमारी सनातन परंपराओं और जीवन मूल्यों की चेतना का आधार है, और विश्व कल्याण के लिए भारत का सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अराष्ट्रीय तत्वों द्वारा भारतीयता को चुनौती दी जा रही है, इसलिए हमारे लिए ‘शत्रुबोध’ भी होना चाहिए।


उन्होंने केरल में हाल ही में आयोजित माघ कुंभ मेले का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारत की चेतना और सांस्कृतिक गौरव का साक्षात प्रमाण है। इसके अलावा, उन्होंने डिजिटल लेन-देन में भारतीय यूपीआई की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता का जिक्र करते हुए इसे भारत की वैश्विक सशक्तता का प्रतीक बताया।


इस परिचर्चा में प्रदेशभर के विद्वानों ने पत्रिका में प्रकाशित 36 आलेखों पर अपने विचार साझा किए। परिचर्चा का संचालन डॉ. इंदुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने किया, जबकि प्रस्तावना विकास तिवारी ने रखी। अन्य प्रमुख उपस्थितियों में विपिन चंद्र पाठक और अनाराम जी शामिल थे।

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