जयपुर/अजमेर, 30 मार्च। सरकार के आश्वासनों से निराश ‘ओरण बचाओ’ पदयात्रियों ने एक बार फिर अपना आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। मांगें पूरी नहीं होने पर स्थगित की गई ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ अब 31 मार्च 2026 से पुनः शुरू होगी।
ओरण एवं गोचर भूमि को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करवाने की मांग को लेकर जैसलमेर सहित पूरे मारवाड़ क्षेत्र में पिछले एक दशक से जनआंदोलन जारी है। बार-बार पदयात्राएं, धरने और ज्ञापन देने के बावजूद सरकार द्वारा केवल आश्वासन दिए जाने से लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
जिला स्तर पर सुनवाई नहीं होने से आक्रोशित पदयात्रियों ने 21 जनवरी 2026 को तनोट माता मंदिर, जैसलमेर से जयपुर के लिए पदयात्रा शुरू की थी। यात्रा के दौरान तनोट से अजमेर तक कई दौर की वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका।
18 मार्च 2026 को संभागीय आयुक्त कार्यालय, अजमेर पहुंचने पर प्रशासन ने 24 मार्च तक अधिकांश मांगें पूरी करने और शेष पर लिखित सहमति देने का आश्वासन दिया था। इसी आधार पर पदयात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया।
हालांकि जयपुर में हुई वार्ताओं के बाद भी जब कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया, तो सरकार की मंशा पर सवाल उठने लगे। टीम ओरण के सुमेरसिंह साँवता ने कहा कि सरकार का रुख ओरण संरक्षण को लेकर सकारात्मक नहीं है।
टीम ओरण के भोपालसिंह झलोडा ने बताया कि सरकार की निष्क्रियता के चलते अब पदयात्रा 31 मार्च से पुनः शुरू होगी, जो संभागीय आयुक्त कार्यालय, अजमेर से आगे बढ़ेगी।
पदयात्रियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। उनकी प्रमुख मांगों में जयपुर तक पहुंची ओरण-गोचर भूमि से संबंधित पांच फाइलों पर तुरंत कार्रवाई कर उन्हें राजस्व अभिलेखों में दर्ज करना शामिल है। इसके साथ ही ओरण, गोचर, तालाब, उनके आगोर-पाछोर, खडीन, नदी-नाले, कुएं, बेरियां, बावड़ियां, छतरियां, देवलियां, शिलालेख, ऐतिहासिक स्मारक, मंदिर, ढाणियां और आम रास्तों को राजस्व रिकॉर्ड में शामिल करने के स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग भी उठाई गई है।
