जयपुर
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ये देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने और संतुलित विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एमएसएमई क्षेत्र देश की जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देता है और समावेशी आर्थिक प्रगति का एक प्रमुख स्तंभ है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। देश 11वें स्थान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। इस विकास यात्रा में एमएसएमई क्षेत्र निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह बात राजस्थान सरकार के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री ने द्वारा आयोजित 7वें राजस्थान एमएसएमई समिट के उद्घाटन सत्र में कही। यह समिट ‘एमएसएमई एज द ग्रोथ इंजिन ऑफ विकसित राजस्थान 2047’ विषय पर आयोजित किया गया।
औद्योगिक विकास के लिए राजस्थान में व्यापक संभावनाएं
मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि राजस्थान अपने विशाल भूमि संसाधनों और निरंतर बेहतर होते इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण औद्योगिक विस्तार के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है। राज्य सरकार द्वारा बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सहयोग दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार एमएसएमई इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024’ के दौरान 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू हस्ताक्षरित हुए, जिनमें से लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं धरातल पर उतरना शुरू हो चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार और प्रक्रियाओं के सरलीकरण जैसे कदमों से राज्य में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।
एमएसएमई के लिए बैंकिंग सपोर्ट आवश्यक
, जनरल मैनेजर एवं जोनल हेड तथा एसएलबीसी राजस्थान के संयोजक, , ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करता है, इसलिए इसके विकास के लिए बैंकिंग क्षेत्र का निरंतर सहयोग आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि “बीओबी डिजी उद्यम” जैसी डिजिटल पहल के माध्यम से एमएसएमई के लिए ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है। पूरी तरह डिजिटल लोन प्रोसेसिंग से कार्यक्षमता बढ़ी है और व्यापार करने में आसानी हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि बैंक ग्राहक-केंद्रित सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं, जिनमें वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए विशेष वित्तीय समाधान शामिल हैं। इन सेवाओं में त्वरित प्रोसेसिंग, प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें और सहज डिजिटल एक्सेस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रोजगार और विकास का प्रमुख आधार एमएसएमई
, अध्यक्ष, (आरसीसीआई), ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन का प्रमुख आधार है और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने बताया that एमएसएमई एक्ट के बाद इस क्षेत्र को और मजबूती मिली है, जिससे छोटे उद्योगों को कम लागत पर ऋण प्राप्त करने में सुविधा हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए लगभग 27 नीतियां लागू की गई हैं। वर्तमान में यह क्षेत्र देश में करीब 20 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रहा है और जीडीपी में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
डॉ. जैन ने इस क्षेत्र के विकास के लिए कुशल कारीगरों की उपलब्धता, नवाचार, आधुनिक तकनीक के उपयोग, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने सरकार और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय तथा मार्केटिंग और वित्तीय संसाधनों की कमी को दूर करने की जरूरत भी बताई।

