जयपुर, 29 मार्च। राजधानी जयपुर के मानसरोवर स्थित प्रियंका हॉस्पिटल एंड कार्डियक सेंटर में राजस्थान की पहली हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट क्लीनिक का शुभारंभ किया गया। यह पहल एमजीएम हेल्थकेयर, चेन्नई के सहयोग से शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य राजस्थान सहित आसपास के राज्यों के गंभीर हृदय एवं फेफड़ा रोगियों को समय पर विशेषज्ञ परामर्श, उन्नत जांच और ट्रांसप्लांट संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विधायक बहादुर सिंह कोली एवं बलवंत सिंह लिगरी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
विशेषज्ञों ने बताया कि कई मामलों में मरीजों को समय पर सही मूल्यांकन, ट्रांसप्लांट रेफरल और एडवांस्ड सपोर्ट सिस्टम की जानकारी नहीं मिल पाती, जिसके कारण उपचार में देरी होती है। नई ओपीडी के माध्यम से अब मरीजों को जयपुर में ही प्रारंभिक विशेषज्ञ राय, रोग की गंभीरता का आकलन, ट्रांसप्लांट योग्यता मूल्यांकन और आगे की उपचार योजना पर मार्गदर्शन मिल सकेगा।
डॉ. सुरेश राव केजी ने बताया कि हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन आज एंड-स्टेज ऑर्गन फेल्योर से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवनदायी विकल्प बन चुका है। उन्होंने कहा कि ईसीएमओ (एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनशन) तथा मैकेनिकल सर्क्युलेटरी सपोर्ट जैसी आधुनिक जीवनरक्षक तकनीकें गंभीर अवस्था के मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इस अवसर पर डॉ. सौमित्रा सिन्हा रॉय ने कहा कि फेफड़ों से संबंधित कई गंभीर बीमारियों में मरीज लंबे समय तक सही निदान और उचित रेफरल से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने बताया कि इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस, एडवांस्ड सीओपीडी, पल्मोनरी हाइपरटेंशन और एंड-स्टेज लंग डिज़ीज़ जैसी स्थितियों में समय पर विशेषज्ञ परामर्श और ट्रांसप्लांट मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक होता है।
एमजीएम हेल्थकेयर, चेन्नई की हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट टीम देश की अग्रणी टीमों में से एक है और संस्थान द्वारा 750 से अधिक हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। अब इसी विशेषज्ञता का लाभ जयपुर में ओपीडी परामर्श और मरीज चयन प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रियंका हॉस्पिटल एंड कार्डियक सेंटर के चेयरमैन डॉ. जी. एल. शर्मा ने बताया कि इस पहल से राजस्थान के मरीजों को अब बड़े महानगरों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें प्रारंभिक स्तर पर ही सही दिशा, विशेषज्ञ राय और समन्वित उपचार मार्गदर्शन मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि यह ओपीडी भविष्य में गंभीर हार्ट एवं लंग डिज़ीज़ के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण रेफरल एवं परामर्श केंद्र के रूप में विकसित होगी।
इस अवसर पर डॉ. जी. एल. शर्मा, डॉ. के. आर. बालाकृष्णन, डॉ. सुरेश राव केजी एवं डॉ. सौमित्रा सिन्हा रॉय सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


