जयपुर, 22 अप्रैल। राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की आधिकारिक लिरिक्स में विसंगतियों को लेकर देशप्रेमियों में आक्रोश और चिंता सामने आई है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय और कला एवं संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइटों पर प्रकाशित लिरिक्स में शब्दों और संरचना के स्तर पर अंतर पाए जाने का मुद्दा अब तूल पकड़ रहा है।
राष्ट्रपति से सम्मानित नैतिक शिक्षाविद एवं आध्यात्मिक चिंतक आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया ने जयपुर में इस विषय पर चिंता जताते हुए कहा कि राष्ट्र की आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम की चेतना के प्रतीक ‘वंदे मातरम्’ की आधिकारिक लिपि में इस प्रकार की विसंगति गंभीर विषय है। उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए त्रुटियों को शीघ्र दूर करने की अपील की है।
इस अवसर पर नृत्य गुरु एवं अभिनेत्री उषाश्री, डॉ. अमित पाटोदिया, बृज किशोर श्रीवास्तव, अंतरराष्ट्रीय गायक मुन्ना लाल भाट और मुरलीधर पाटोदिया सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आचार्य पाटोदिया ने बताया कि राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील और गौरवपूर्ण विषय पर किसी भी प्रकार की त्रुटि न केवल ऐतिहासिक तथ्यों के साथ अन्याय है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय अस्मिता से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत को शुद्ध शब्दावली के साथ अपने स्वर में प्रस्तुत किया तथा उपस्थित लोगों को इसकी सही जानकारी दी। साथ ही गीत की सैकड़ों प्रतियां भी वितरित की गईं।
उन्होंने कहा कि इन विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन अब तक संबंधित मंत्रालयों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि 15 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने का प्रयास भी किया गया, लेकिन संवाद स्थापित नहीं हो सका।
150 वर्ष पूरे होने के बीच सामने आई खामियां चिंताजनक
आचार्य पाटोदिया ने कहा कि 7 नवंबर 2025 को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होना देश के लिए गर्व का विषय है। ऐसे समय में जब देश इस ऐतिहासिक विरासत का उत्सव मना रहा है, तब इसकी आधिकारिक लिपि में भिन्नता और त्रुटियां सामने आना अत्यंत चिंताजनक है।
शुद्ध स्वरूप डिजिटल माध्यम पर उपलब्ध
उन्होंने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ का संपूर्ण एवं शुद्ध संस्करण स्वरबद्ध कर उनके यूट्यूब चैनल “आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया” पर उपलब्ध कराया गया है, ताकि आमजन इसके मूल स्वरूप से परिचित हो सकें और राष्ट्रभक्ति की भावना को और अधिक सशक्त बना सकें।
गौरतलब है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, विशेष रूप से 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह गीत जन-जन के स्वाभिमान और क्रांति का प्रतीक बना।
उल्लेखनीय है कि आचार्य सत्यनारायण पाटोदिया को 2 मई 2025 को भारत के महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

