मेजर जनरल रंजन महाजन की पुस्तक ‘कश्मीर इन द लाइन ऑफ फायर’ पर चर्चा अशोक क्लब में हुआ आयोजन

 


जयपुर, 5 अप्रैल। ‘कश्मीर इन द लाइन ऑफ फायर’ पर आयोजित एक ज्ञानवर्धक पुस्तक चर्चा में मेजर जनरल रंजन महाजन ने भारतीय सेना की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पुस्तक साधारण लोगों द्वारा असाधारण परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करने की सच्ची कहानी है।



अशोक क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने जयपुर के लेखक एवं पब्लिसिस्ट जगदीप सिंह के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कश्मीर में अपने पांच कार्यकालों के अंतर्गत 15 वर्षों की सेवा के दौरान के कई प्रभावशाली अनुभव साझा किए, जिससे श्रोताओं को संघर्ष, नेतृत्व और मानवीय दृढ़ता की वास्तविकताओं को समझने का अवसर मिला।

पुस्तक का औपचारिक विमोचन राजस्थान के पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा, चीफ ऑफ स्टाफ (साउथ वेस्टर्न कमान) लेफ्टिनेंट जनरल पदम सिंह शेखावत तथा अजय सिंघा द्वारा किया गया।

पुस्तक लिखने के पीछे अपनी प्रेरणा के बारे में बताते हुए मेजर जनरल महाजन ने कहा कि यह ‘मेमॉयर’ कश्मीर की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करने और अपने अनुभवों को दर्ज करने की इच्छा से लिखा गया है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को तैयार करने में कई वर्ष लगे, जिसमें पुरानी यादों को संजोना, उन्हें व्यवस्थित रूप देना और पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना शामिल रहा।



पुस्तक की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें क्यूआर कोड्स का उपयोग किया गया है, जिनकी मदद से पाठक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन्स सहित विभिन्न विज़ुअल्स को रियल-टाइम में देख सकते हैं। इसका उद्देश्य पाठकों को सेना के कार्यों को अधिक गहराई से समझने का अवसर देना है।



चर्चा के दौरान राष्ट्रीय राइफल्स की भूमिका पर भी विस्तार से बात की गई। उन्होंने बताया कि यह एक विशेष काउंटर-इन्सर्जेंसी बल है, जिसे आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए तैयार किया गया है।


उन्होंने कश्मीरी पंडितों के पलायन को अपने कार्यकाल की सबसे भावनात्मक घटनाओं में से एक बताते हुए संघर्ष के मानवीय प्रभावों पर भी प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने सैनिकों के साहस और संघर्ष से जुड़े कई प्रेरणादायक व अनसुने किस्से भी साझा किए।

कार्यक्रम का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें दर्शकों ने सैन्य रणनीति और कश्मीर की स्थिति जैसे विभिन्न विषयों पर चर्चा की। शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई, जबकि अंत धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

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