जयपुर
राजधानी जयपुर के त्रिवेणी नगर स्थित संस्कृत केंद्रीय विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित “तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे” कार्यक्रम ने संगीत प्रेमियों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ दी। आस्थिका एंटरटेनमेंट द्वारा आयोजित इस भव्य संगीतमय संध्या में स्वर कोकिला लता मंगेशकर और सुर साम्राज्ञी आशा भोसले को 30 से अधिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शहर के कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने एक के बाद एक मंच संभालते हुए सदाबहार गीतों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसने दर्शकों को पुराने दौर की यादों में डुबो दिया।
गीतों की शानदार श्रृंखला, हर प्रस्तुति बनी यादगार
कार्यक्रम की शुरुआत बेला जी की मधुर प्रस्तुति “आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलूं” से हुई, जिसने शुरुआत में ही माहौल को सुरमयी बना दिया। इसके बाद प्रियंका गौर ने “दूर ना रहे कोई आज इतने करीब आओ” और “ये दिल और उनकी निगाहों के साये” जैसे गीतों से दर्शकों का दिल जीत लिया।
राजीव और संध्या नागर की जोड़ी ने “अभी ना जाओ छोड़ कर” को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया। वहीं संध्या ने “सोलह बरस की बाली उमर” गाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
जी.एल. पारीक और ममता जैन ने “दिल की गिरह खोल दो” को भावपूर्ण अंदाज में पेश किया, जबकि सुबे सिंह और ममता जैन ने “ये पर्दा हटा दो” में शानदार तालमेल दिखाया।
रिजवान और संध्या ने “ये कहां आ गए हम” के जरिए रोमांटिक माहौल बनाया, वहीं विनिता कोडवानी ने “इन आंखों की मस्ती” गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राजीव और बेला की जोड़ी ने “ओ मेरे सनम” को खूबसूरती से प्रस्तुत किया, जबकि बेला और संध्या ने “छाप तिलक सब छीनी” में सूफियाना रंग घोला।
युगल और सोलो प्रस्तुतियों ने बांधा समां
मनीष बट्टा और रश्मि ने “इंतहा हो गई इंतजार की” को जोशपूर्ण अंदाज में पेश किया। सुबे सिंह और ममता छाबड़ा ने “तुमसे मिलके ऐसा लगा तुमसे” में भावनात्मक गहराई दिखाई।
मनीष बट्टा और संध्या ने “पिया पिया पिया मेरा जिया पुकारे” से माहौल को और भी जीवंत किया। फतेह और बेला ने “हुस्न पहाड़ों का” को खूबसूरती से निभाया, जबकि फतेह जी ने “मेरी सांसों को जो महका” का सोलो प्रस्तुत किया।
रश्मि ने “शीशा हो या दिल हो” को दमदार अंदाज में पेश किया। मुकेश और ममता छाबड़ा ने “देखो मैंने देखा है” गाकर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
फतेह जी और संध्या असवाल ने “जी हाले मिस्किन” को भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया। विनोद गर्ग और प्रियंका गौर ने “धीरे-धीरे बोल कोई सुन ना ले” में शानदार केमिस्ट्री दिखाई।
फिल्मी क्लासिक्स से सजी महफिल
विनोद गर्ग और अपर्णा बाजपेयी ने “हमसफर मेरे हमसफर” को खूबसूरती से पेश किया। उषा नायर ने “तूने ओ रंगीले कैसा जादू” से दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया।
![]() |
एस. नगर ने “तेरे संग प्यार में” को भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया। समीर जी और संध्या जी ने “तेरे प्यार की उम्र हो” गाया, जबकि समीर और प्रमिला ने “रिमझिम के गीत सावन गाए” में शानदार प्रस्तुति दी।
विशेष प्रस्तुतियां और ग्रैंड फिनाले
कार्यक्रम में एन.एस. मेहता और प्रियंका गौर ने “बेखुदी में सनम” को यादगार बना दिया, वहीं एन.एस. मेहता और प्रज्ञा जैन ने “प्यार हमारा अमर रहेगा” में शानदार तालमेल दिखाया।
रोहित कटारिया और उनकी पत्नी द्वारा प्रस्तुत “मेश-अप” ने कार्यक्रम में आधुनिकता का तड़का लगाया।
कार्यक्रम का टाइटल सॉन्ग “तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे” हेमंत और अपर्णा बाजपेयी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे माहौल को भावुक कर दिया।
अंत में अपर्णा बाजपेयी ने “खुशी खुशी कर दो / तू कितनी अच्छी है” प्रस्तुत कर मातृत्व को समर्पित भावनात्मक समापन किया।
सहयोग और आयोजन
इस भव्य आयोजन में सेवाकुंज फाउंडेशन, निवाला फाउंडेशन और ज्ञानम फाउंडेशन का विशेष सहयोग रहा। सेवाकुंज फाउंडेशन की वाइस प्रेसिडेंट अर्चना पुरोहित की सक्रिय भूमिका रही।
कार्यक्रम का सफल संचालन आस्थिका एंटरटेनमेंट की फाउंडर एवं डायरेक्टर अपर्णा बाजपेयी द्वारा किया गया।
देश-विदेश तक पहुंचा कार्यक्रम
इस पूरे आयोजन का लाइव प्रसारण A-one Imagine TV भक्ति चैनल के माध्यम से किया गया, जिससे भारत सहित अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में दर्शकों ने इस संगीतमय शाम का आनंद लिया।
फैशन शो ने जोड़ा खास आकर्षण, मातृत्व को समर्पित रही प्रस्तुति
संगीतमय प्रस्तुतियों के बीच कार्यक्रम में एक विशेष फैशन शो का भी आयोजन किया गया, जिसने शाम को और अधिक आकर्षक बना दिया। यह फैशन शो मदर्स डे को समर्पित रहा, जिसमें Leela Sarees के खूबसूरत कलेक्शन को मंच पर प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी बसंत जैन ने कहा कि संगीत हमारे जीवन में तनाव को कम करने और मानसिक शांति देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के उच्चस्तरीय संगीत कार्यक्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि कार्यक्रम में आयोजित फैशन शो भी बेहद आकर्षक रहा, जिसमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। इस तरह के आयोजन महिलाओं को मंच देने के साथ-साथ समाज में आत्मविश्वास और सशक्तिकरण को भी बढ़ावा देते हैं।
निष्कर्ष
“तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे” सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संगीत के स्वर्णिम युग को फिर से जीवंत करने का एक प्रयास था। हर कलाकार ने अपने अंदाज में लता मंगेशकर और आशा भोसले के अमर गीतों को प्रस्तुत कर यह साबित किया कि सच्चा संगीत कभी पुराना नहीं होता।
जयपुर की यह संगीतमय शाम लंबे समय तक लोगों की यादों में बनी रहेगी।

























