जयपुर, 18 मई। ने विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर ब्राजील से प्राप्त एक अत्यंत दुर्लभ अमेथिस्ट एगेट पत्थर को प्रदर्शित करने की घोषणा की है। इस प्राकृतिक पत्थर की विशेषता यह है कि इसके तीन जुड़े हुए हिस्से कैलाश पर्वत जैसे दिखाई देते हैं और इनमें स्वयंभू रूप में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का आभास होता है।
करीब 100 किलोग्राम वजनी यह अमेथिस्ट एगेट सिंगल पीस में प्राप्त हुआ है, जो भूगर्भीय कला का अद्भुत उदाहरण माना जा रहा है। पत्थर के भीतर कैल्साइट का एक टुकड़ा समाहित है और इसके तीनों गोलाकार जुड़े हुए खंड इसे भूगर्भीय एवं आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ बनाते हैं।
म्यूजियम निदेशक ने बताया कि यह दुर्लभ पत्थर अपनी अनोखी संरचना के साथ गहरी धार्मिक भावना और मानसिक-भावनात्मक संतुलन के गुणों के कारण भी विशेष महत्व रखता है। अमेथिस्ट एगेट को तनाव कम करने, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव करने और मन को शांत रखने वाला माना जाता है।
उन्होंने बताया कि विश्व संग्रहालय दिवस पर इस विशेष पत्थर को जौहरी बाजार स्थित म्यूजियम के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शित किया जाएगा ताकि आगंतुक इसे सबसे पहले देख सकें। खजाना महल म्यूजियम पत्थर से आभूषण तक के सफर को दर्शाने के लिए प्रसिद्ध है और यह नया संग्रह उसी विरासत को और समृद्ध करता है।
अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि म्यूजियम में पहले से ही 8.5 फुट ऊंचा अमेथिस्ट एगेट ड्रूजी भी प्रदर्शित है। ब्राजील से लाए गए इस नए भूगर्भीय नमूने के जुड़ने से म्यूजियम देश के चुनिंदा रत्न एवं खनिज संग्रहालयों में और अधिक विशिष्ट बन गया है।
जयपुर स्थित यह म्यूजियम सदियों पुरानी रत्न कटाई और आभूषण निर्माण की विरासत को प्रदर्शित करता है। यहां कच्चे पत्थरों, पॉलिश किए गए रत्नों, पारंपरिक आभूषणों और लाइव स्टोन कटिंग डेमो के माध्यम से आगंतुकों को रत्नों की दुनिया से परिचित कराया जाता है।
म्यूजियम शिक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाता है तथा छात्रों, डिजाइनरों और पर्यटकों के लिए नियमित रूप से विशेष सत्र आयोजित करता है। ब्रह्मा-विष्णु-महेश अमेथिस्ट एगेट के प्रदर्शन से म्यूजियम को विश्व संग्रहालय दिवस और आगामी पर्यटन सीजन में विशेष आकर्षण मिलने की उम्मीद है।


